कितने प्रकार के होते हैं  Networking Device?

Image Credit : Google

राउटर का काम OSI Network मॉडल के तीसरे लेयर पर होता है। इसका काम पहले डाटा को पैकेट के रूप में बदलने और फिर राउटर तक पहुंचाने के साथ Routing Table और Routing Protocol का यूज करना है। इसके बाद ये डाटा को डेस्टिनेशन कंप्यूटर के राउटर के पास भेजने का काम करता है।

Image Credit : Google

Router

कई कंप्यूटर और नेटवर्क डिवाइस को हब जोड़ने का काम करता है। एक Hub में कई सारे port होते हैं जिसके जरिए डिवाइस को आपस में जोड़ा जा सकता है। ये OSI मॉडल के प्रथम लेयर पर काम करता है।

Image Credit : Google

Hub

हब की तरह ही नेटवर्क स्वीच होता है जिसे नेटवर्किंग डिवाइस कहा जाता है। इसका इस्तेमाल भी कई अन्य नेटवर्क डिवाइस और कंप्यूटर को आपस में जोड़ने का होता है। ये एक कंप्यूटर में दूसरे कंप्यूटर के जरिए डाटा सेंड करता है।

Image Credit : Google

Switch

एक जैसे प्रोटोकॉल वाले नेटवर्क को जोड़ने के लिए ये डिवाइस काम आता है। किसी कंप्यूटर में जब किसी नेटवर्क से किसी अन्य नेटवर्क का डाटा भेजा जाता है तो इस दौरान ये डाटा ब्रिज के पास पहुंचता है।

Image Credit : Google

Bridge

नेटवर्क में भी सिग्नल को पोस्ट करने के लिए रिपीटर नेटवर्किंग डिवाइस का इस्तेमाल होता है। नेटवर्क में दिक्कत आने पर ये सिग्नल को Regenerate करता है और इस स्ट्रेंथ और इंटेंसिटी को बढ़ाता है।

Image Credit : Google

Repeater

एक दूसरे से अलग प्रोटोकॉल वाले नेटवर्क को गेटवे जोड़ने का काम करता है। ये डिवाइस ट्रैफिक को नेटवर्क में जाने में सक्षम बनाता है।

Image Credit : Google

Gateway

ये एक नेटवर्किंग डिवाइस है जिसका इस्तेमाल माड्यूलेशन और डीमाड्यूलेशन से कंप्यूटर तक डाटा को पहुंचाने के लिए किया जाता है। डिजिटल सिग्नल को एनालॉग सिगनल में बदलने वाली विधि को माड्यूलेशन कहा जाता है।

Image Credit : Google

Modem

नेटवर्किंग में केवल को सबसे खास माना जाता है। इसके जरिए बड़े नेटवर्क को बनाना संभव होता है। बिना केबल के इंटरनेट नेटवर्क को बनाना मुमकीन नहीं है।

Image Credit : Google

Cable