हम जिस शहर की बात कर रहे हैं, उसमें आखिरी बार साल 1917 में एक शख्स की मौत हुई थी.
इस शहर का नाम?
हम जिस अनोखे शहर की बात कर रहे हैं, वो नॉर्वे का लॉन्गईयरब्येन है.
कड़ाके की पड़ती है ठंड
नॉर्वे का ये अनोखा शहर, उत्तरी ध्रुव के करीब होने के कारण यहां का तापमान -20 से -30 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है. इस कारण यहां शव प्राकृतिक रूप से सड़ नहीं पाते हैं.
दशकों पुराने शव आज भी मौजूद
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जिन शवों को दशकों पहले यहां दफनाया गया था, वह आज भी सड़े नहीं है.
बीमारी का खतरा
शव के न सड़ने के कारण आसपास के इलाकों में गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है.
वैज्ञानिकों ने खोले राज
वैज्ञानिकों की एक रिसर्च के मुताबिक, ठंड में शरीर के न सड़ने पर उनके अंदर खतरनाक वायरस और बैक्टीरिया सालों तक जिंदा रह सकते हैं, जिससे महामारी का खतरा बढ़ जाता है.
अगर किसी को आ रही हो मौत?
अगर इस देश में रहने वाला कोई व्यक्ति मौत के करीब पहुंच जाता है, तो उसे शहर छोड़ना पड़ता है.