Monday, April 6, 2020

चैत्र नवरात्रि: मां भवानी ने ऐसे किया था असुरों का संहार, जानें क्या है कथा

Chaitra Navratri 2020: : कोरोना वायरस के जानलेवा कहर के बीच इन दिनों भारत समेत दुनियाभर में मां भवानी के भक्त चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) का महापर्व मना रहे है। मान्यता के मुताबिक दरअसल नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा की जाती है।

Chaitra Navratri 2020: कोरोना वायरस के जानलेवा कहर के बीच इन दिनों भारत समेत दुनियाभर में मां भवानी के भक्त चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) का महापर्व मना रहे है। मान्यता के मुताबिक दरअसल नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा की जाती है।

पौराणिक धार्मिक कथा के मुताबिक प्राचीन काल में देवताओं और असुरों के बीच लंबे समय तक युद्ध चला। असुरों का स्वामी महिषासुर था और देवताओं के स्वामी इंद्र थे। महिषासुर ने देवाताओं पर विजय प्राप्त कर इंद्र का सिंहासन हासिल कर लिया और स्वर्गलोक पर राज करने लगा। इसे देखकर सभी देवतागण परेशान हो गए और इस समस्या से निकलने का उपाय जानने के लिए त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास गए।

देवताओं ने बताया कि महिषासुर ने इंद्र, चंद्र, सूर्य, वायु और अन्यत देवताओं के सभी अधिकार छीन लिए हैं और उन्हें बंधक बनाकर स्वर्गलोक का राजा बन गया है। देवाताओं ने बताया कि महिषासुर के अत्याचार के कारण अब देवता पृथ्वी पर विचरण कर रहे हैं और स्वर्ग में उनके लिए कोई जगह नहीं है। ये सुनकर ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शंकर को बहुत गुस्सा आया। तीनों देवता के गुस्से की कोई सीमा नहीं थी।

गुस्से की वजह से तीनों के मुख से ऊर्जा उत्पन्न हुई। और देवगणों के शरीर से निकली ऊर्जा भी उस ऊर्जा से जाकर मिल गई। ये दसों दिशाओं में व्या्प्त होने लगी। तभी वहां एक देवी का अवतरण हुआ। भगवान शंकर ने देवी को त्रिशूल और भगवान विष्णु ने चक्र प्रदान किया। इसी प्रकार अन्य देवी देवताओं ने भी माता के हाथों में अस्त्र शस्त्र सजा दिए। इंद्र ने भी अपना वज्र और ऐरावत हाथी से उतरकर एक घंटा दिया। सूर्य ने अपना तेज और तलवार दिया और सवारी के लिए शेर दिया। तभी उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा।

अब देवी महिषासुर से युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार थीं। उनका विशालकाय रूप देखकर महिषासुर ये समझ गया कि अब उसका काल आ गया है। महिषासुर ने अपनी सेना को देवी पर हमला करने को कहा, अन्य दैत्य और दानवों के दल भी युद्ध में कूद पड़े। लेकिन देवी ने एक ही झटके में दानवों का संहार कर दिया। इस युद्ध में महिषासुर तो मारा ही गया, साथ में अन्य बड़े दानवों और राक्षसों का भी मां दुर्गा ने संहार कर दिया। इस तरह मां दुर्गा ने सभी देवताओं को असुरों से मुक्ति दिलाई।

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