गर्भवती महिलाएं जानें, ऐसे बचे जीका वायरस से

नई दिल्‍ली (1 फरवरी): जीका वायरस से गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा खतरा है। इस वायरस से माइक्रोसेफेली नाम की बीमारी होती है। माइक्रोसेफली तब भी संभव है, जब गर्भवती महिला अल्कोहल सेवन करे, कुपोषित हो या उसे डायबिटीज हो। इसलिए गर्भवती महिलाएं खासतौर पर एल्कोहल का सेवन न करें। पौष्टिक खान-पान पर ध्यान दें। डायबिटीज से बची रहें।

अक्‍टूबर से लेकर अब तक ब्राजील में 3500 से ज्यादा छोटे सिर और अवि‍कसि‍त दिमाग वाले बच्‍चे पैदा हुए हैं। अगर गर्भवती महिलाएं इस वायरस के चपेट में आ जाएं, तो उनके पेट में पल रहा शिशु नहीं बच सकता। यह वायरस बच्‍चों के ब्रेन का विकास रोक देता है, जिससे उनका सिर छोटा ही रह जाता है। हो सकता है कि बच्‍चे की मौत भी हो जाए।

जीका के लक्षण:

इसके लक्षणों का पता संक्रमित मच्‍छर के काटने के 10 दिन बाद लगता है। अगर सिरदर्द, हल्‍का बुखार, सर्दी, लाल आंखें, जोड़ों और मासपेशियों में दर्द और शरीर पर लाल रंग के चक्‍त्‍ते दिखें तो तुरंत ही डॉक्‍टर के पास जाएं। फिलहाल इस वायरस का मुकाबला करने के लिए कोई उपचार या टीका नहीं बना है।

वायरस से बचने के उपाय:

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि मच्छरों से बचने के लिए पूरे शरीर को ढककर रखें और हल्के रंग के कपड़े पहनें। घर के आसपास गमले, बाल्टी, कूलर आदि में भरा पानी निकाल दें। बुखार, गले में खराश, जोड़ों में दर्द, आंखें लाल होने जैसे लक्षण नजर आने पर अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन और भरपूर आराम करें। मच्‍छरदानी, मॉस्‍िकटो रैपलेंट का उपयोग करें।