'ज़ीका वायरस' के प्रकोप से सहमी दुनिया, पढ़िये क्या है ज़ीका वायरस, क्यों और कितना है घातक

नई दिल्ली (29जनवरी): विदेश मंत्रालय की एक एडवायज़री में कहा कि विदेश जाने वाले नागरिक उन देशों की यात्रा न करें जहां ज़ीका वायरस फैला हुआ है। इसके अलावा विश्व स्वास्थय संगठन (डब्लूएचओ) ने कहा है कि ज़ीका वायरस भारत के लिए भी खतरनाक हो सकता है। इसलिए समय से पहले बचाव के उपाय कर लेने चाहिए। डब्लूएचओ ने कहा है कि ज़ीका वायरस एडीस मच्छर के काटने से फैलता है।

इसी मच्छर से डेंगी और चिकिनगुनिया जैसे घातक वायरल बुखार भी फैलते हैं। डेंगी नें भारत में पिछले चार-पांच सालों में काफी कहर बरपाया है। इसलिए आशंका है कि ज़ीका भारत पर भी असर कर सकता है। ज़ीका वायरस अमेरिका के 22 देशों और ब्राजील में हजारों गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर हमला कर चुका है।  ज़ीका से समय पूर्व बचाव के लिए केंद्रीय स्वाथ्य विभाग ने सेंटर फॉर कम्यूनिकेबल डिसीज (सीडीसी) को चिट्ठी लिख कर वायरस से संक्रमित मरीज की जांच के लिए टेस्टिंग किट की मांग की है।

इसके अलावा सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से भी अनुरोध किया है कि ज़ीका वायरस से संबंधित गाइड लाइंस, इलाज और बचाव के लिए भारत के लिहाज से मदद करे। आइए, आपको बताते हैं कि आखिर ज़ीक वायरस है क्या, कहां से आया, इस का प्रभाव कितना घातक है और इसका उपचार क्या है:

ज़ीका वायरस

* यह वायरस दिन में एक्टिव रहने वाले एडीस और एजीप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। 

* इस समय 20 उत्तरी अमेरिकी देश, ब्राज़ील और डोमेनिक रिपब्लिक और कुछ अफरीकी देशों में ज़ीका वायरस का प्रकोप फैला हुआ है।

* पहले 1952 में अफ्रीका के ज़ीका फॉरेस्ट में रहने वाले मैके बंदरों में एक खास तरह का वायरस पाया गया था। इसलिए इसका नाम ज़ीका रखा गया। 

* एडीस और एजीप्टी मच्छरों के अलावा इंफेक्टेड पर्सन के साथ 'अन-प्रोटेक्टेड रिलेशन' बनाने से भी फैलता है।

* ज़ीका वायरस से इनफेक्टेड मरीज में लगभग सभी वो सिमटम्स होते हैं जो डेंगी और चिकिनगुनिया में होते हैं। इसलिए इसकी पहचान करना कठिन होता है। 

* डेंगी और चिकिनगुनिया का वैक्सीन उपलब्ध है मगर ज़ीका वायरस का अभी कोई इलाज नहीं है।

* ज़ीका वायरस का वैक्सीन दस से बारह साल बाद बाजार में उपलब्ध हो पायेगा। इसलिए फिल्हाल इसके संक्रमण से बचकर रहना ही इसका उपचार है।

* ज़ीका वायरस से पीड़ित मरीजों की मॉर्टेलिटी रेट तो शून्य है, मगर प्रेग्नेंट महिलाएं ज़ीका वायरस से इंफेक्टेड हो जाती हैं तो उनके नवजात बच्चे पर घातक असर होता है।

* ज़ीका वायरस, मां के गर्भ में ही बच्चे के मस्तिष्क पर हमला कर देता है। जन्म के बाद बच्चे का ब्रेन का डेवलपमेंट नहीं होता। यानि बच्चे मानसिक विकलांग पैदा होते हैं। इस वायरस से पीड़ित कुछ बच्चों जन्म के तुरंत बाद मौत भी हो जाती है। जो जीवित बचते हैं वो जिंदगी भर आश्रित रहते हैं।

* इस बार ज़ीका वायरस ब्राज़ील से शुरु होकर साउथ और सेंट्रल अमरीका और कैरेबियन देशों में फैल चुका है।

* 20 जनवरी 2016 को ब्राज़ील के चिकित्सा वैज्ञानिकों ने एक गर्भवती महिला के प्लैसेंटा की जांच के बाद कहा कि ज़ीका वायरस लौट आया है।

* भारत सहित विभिन्न देशों की सरकारों ने अपने नागरिकों से कहा है कि वो ज़ीका प्रभावित बारबाडोस, बोलिविया, ब्राज़ील, कोलंबिया, डोमेनिक रिपब्लिक, एक्वाडोर, एल-सलवाडोर, गुयाना, हैती, होंडुरस, फ्रेंच गुयीआना, ग्वाटेमाला, मैक्सिको, पनामा, पराग्वे, प्यूटिरिको, सैंट मार्टिन, सूरिनाम और वेनेज़ुएला की यात्रा पर जाने से बचें।