जाकिर नाईक पर और कसा शिकंजा, विदेशी चंदा से पहले सरकार की अनुमति जरूरी

नई दिल्ली (5 नवंबर): विवादित इस्लामी प्रचारक जाकिर नाईक और उनके ट्रस्ट पर सरकार का शिकंजा लगातार कसता जा रहता है। जाकिर नाईक की संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन यानी IRF को विदेशी फंड मिलने का रास्ता बंद होने जा रहा है। जाकिर नाइक की संस्था IRF को अब विदेशों से फंड लेने से पहले सरकार से अनुमति लेनी होगी। IRF ही नहीं जाकिर की एक अन्य संस्था IRF एजुकेशन ट्रस्ट को भी सरकार की पूर्व सूचना श्रेणी में डाल दिया है। अब सरकार की अनुमति के बिना एजुकेशन ट्रस्ट को भी विदेशी फंड नहीं मिलेगा।


बताया जा रहा है कि जाकिर नाईक और उसकी संस्था के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की जांच में पता चला है कि विदेश फंड का इस्तेमाल युवकों को कट्टरपंथ का पाठ पढ़ाने में किया जा रहा है। ढाका में हुए आतंकी हमले में शामिल एक बांग्लादेशी लड़ाके ने अपने फेसबुक पर लिखा था कि वह जाकिर नाईक के उपदेशों से प्रेरित था। इसके बाद नाईक भारतीय एजेंसियों की नजर में आया। नाईक पीस टीवी के जरिए उपदेश देता है। इस घटना के बाद पीस टीवी को भारत और बांग्लादेश समेत कई देशों ने प्रतिबंधित कर दिया। ढाका धमाके के दौरान नाईक सऊदी अरब में था और उसके बाद वापस नहीं आया है।

आपको बता दें कि जाकिर और IRF की गतिविधियों की लंबी जांच के बाद सरकार ने संस्था की एफसीआरए पंजीकरण रद करने का फैसला किया है। IRF को आखिरी नोटिस जारी करने के साथ यह पंजीकरण रद कर दिया जाएगा।