युवराज सिंह: 'दहाड़' से कांप जाते थे विरोधी, आंखों में आंसू लिए क्रिकेट को कहा अलविदा

न्यूज 24 ब्यूरो, दीपक दुबे, मुंबई (10 जून): युवराज सिंह एक ऐसा क्रिकेटर जिसने भारत को अपने दम पर दो वर्ल्ड कप दिलाए। उनकी क्रिकेट जगत में ऐसी धाक धी की बड़े से बड़े गेंदबाज उन्हें गेंद करने से डरते थे। मैदान में युवराज की दहाड़ से विरोधी टीमें घबराती थीं। अपने 19 साल लंबे करियर में युवराज ने कई उतार-चढ़ाव भरे दौर देखे। आज 2007 टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 क्रिकेट वर्ल्ड कप में जीत के हीरो रहे युवराज सिंह ने मुंबई के साउथ होटल में एक प्रेस कॉन्फ्रेस में अपने संन्यास का ऐलान किया।

37 वर्षीय युवराज सिंह ने भारत के लिए अपना आखिरी वनडे मैच 30 जून 2017 को वेस्टइंडीज के ख़िलाफ़ खेला था। युवी ने अपना आखिरी टी-20 मैच 1 फ़रवरी 2017 को इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेला. जबकि आखिरी टेस्ट मैच दिसंबर 2012 में इंग्लैंड के ही ख़िलाफ़ खेला था।

संन्यास की घोषणा करते हुए युवराज ने अपने पुराने दिनों को याद किया। अपने तीन सबसे यादगार पारियों के बारे में बताते हुए, 2011 वर्ल्ड कप जीतना, 2007 के टी-20 विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ लगाए गए 6 गेंदों 6 छक्के और लाहौर में बनाया गया अपना पहला टेस्ट शतक को बताते हैं। संन्यास का ऐलान करते हुए भावुक युवराज ने कहा, "मैं बचपन से ही अपने पिता के नक्शेकदम पर चला और देश के लिए खेलने के उनके सपने का पीछा किया। मेरे फैन्स ने हमेशा मेरा समर्थन किया। मेरे लिए 2011 वर्ल्ड कप जीतना, मैन ऑफ़ द सिरीज़ मिलना सपने की तरह था। इसके बाद मुझे कैंसर हो गया। यह आसमान से ज़मीन पर आने जैसा था। उस वक्त मेरा परिवार, मेरे फैन्स मेरे साथ थे।"उन्होंने कहा, "एक क्रिकेटर के तौर पर सफ़र शुरू करते वक्त मैंने सोचा नहीं था कि कभी भारत के लिए खेलूंगा। लाहौर में 2004 में मैने पहला शतक लगाया था। टी-20 वर्ल्ड में 6 गेंदों में 6 छक्के लगाना भी यादगार था।"संन्यास के फैसले को लेकर पूछे गए सवाल पर युवराज ने कहा, "सफलता भी नहीं मिल रही थी और मौके भी नहीं मिल रहे थे। 2000 में करियर शुरू हुआ था और 19 साल हो गए थे। उलझन थी कि करियर कैसे ख़त्म करना है।सोचा कि पिछला टी-20 जो जीते हैं, उसके साथ ख़त्म करता तो अच्छा होता, लेकिन सब कुछ सोचा हुआ नहीं होता। जीवन में एक वक्त आता है कि वह तय कर लेता है कि अब जाना है।"उन्होंने कहा, "मेरे करियर का सबसे बड़ा लम्हा 2011 वर्ल्ड कप जीतना था। जब मैंने पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 84 रन बनाए थे, तब वह करियर का बड़ा मोड़ था। इसके बाद कई मैच में फेल हुआ, लेकिन बार-बार मौके मिले। मैंने कभी 10 हज़ार रन के बारे में नहीं सोचा था, लेकिन वर्ल्ड कप जीतना ख़ास था। मैन ऑफ़ द सिरीज़ रहना, 10 हज़ार रन बनाना, इससे ज़्यादा ख़ास वर्ल्ड कप जीतना था। यह केवल मेरा नहीं, बल्कि पूरी टीम का सपना था।"युवराज अपने दौर के शानदार हरफनमौला क्रिकेटर थे। वनडे में भारत को उनके जैसा खिलाड़ी की तलाश अभी भी जारी है। युवराज ने 304 वनडे खेले उन्होंने 36.56 की औसत से 8701 रन बनाए, जिसमें 14 शतक और 52 अर्धशतक लगाए। टी20 क्रिकेट में युवराज ने भारत के लिए 58 मैचों में आठ अर्धशतकों समेत 1177 रन बनाए। इस फॉर्मेट में युवी 136.38 की स्ट्राइक रेट से खेले।युवराज को अपने करियर में केवल 40 टेस्ट खेलने का मौका मिला और इस दौरान उन्होंने 33.93 की औसत से 1900 रन बनाये।