मुश्किल में युवराज सिंह, दर्ज हुआ घरेलू हिंसा का केस

नई दिल्ली(18 अक्टूबर): टीम इंडिया से बाहर चल रहे बल्लेबाज युवराज सिंह की भाभी आकांक्षा शर्मा ने उनपर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं। अकांक्षा ने युवराज सिंह, उनके भाई जोरावर सिंह और उनकी मां शबनम सिंह पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया है। 

- युवराज सिंह दो भाई हैं, उनके छोटे भाई का नाम जोरावर सिंह है। जोरावर ने एक मार्च, 2014 को गर्लफ्रेंड आकांक्षा शर्मा से शादी की थी, लेकिन 4 महीने के अंदर आकांक्षा अपनी शादी से इतनी परेशान हो गई थीं कि उन्होंने तलाक लेने का फैसला कर लिया था। 

- एक वेबसाइट में छपी एक खबर के मुताबिक, आकांक्षा ने युवराज, उनके भाई और मां के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज करवाया है। आकांक्षा की वकील स्वाति सिंह का इस बारे में कहना है कि वह अभी इस मामले में कुछ नहीं कहेंगी और इस मामले की पहली सुनवाई 21 अक्टबूर को होगी। स्वाति ने बताया कि पहली सुनवाई के बाद ही आकांक्षा कोई बयान देंगी या इस मुद्दे पर कुछ कहेंगी। 

- इस मुद्दे पर बात करते हुए स्वाति ने कहा कि, ''हां, आकांक्षा ने युवराज, जोरावर और उनकी मां शबनम के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज करवाया है।'' 

- स्वाति ने यह भी कहा कि, युवराज सिंह की मां शबनम ने भी हाल ही में आकांक्षा के खिलाफ एक शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसमें उन्होंने आकांक्षा से सारी ज्वैलरी वापस लेने के लिए उन पर शिकायत की थी। उन्होंने कहा कि, संभवत: यह शिकायत सिर्फ गहनों के लिए की गई हो, पैसों को लिए नहीं। 

- युवराज सिंह के इस मामले में शामिल होने को लेकर वकील स्वाति ने कहा कि, 'घरेलू हिंसा का मतलब सिर्फ शारीरिक हिंसा से नहीं है। इसका मतलब मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना से है, जिसमें युवराज भी बराबर के भागीदार हैं। जब जोरावर और उनकी मां, आकांक्षा पर यह अत्याचार कर रहे थे तब युवराज मूक दर्शक बने रहे इसलिए वह भी इस सब के लिए बराबर के जिम्मेदार हैं।' 

- उन्होंने आगे कहा कि, 'जब युवराज और जोरावर की मां आकांक्षा पर बच्चा पैदा करने का दबाव बना रही थी, तब युवराज भी इसमें बराबर के शामिल थे। उन्होंने भी आकांक्षा पर बच्चा पैदा करने का दबाव बनाया था। इस काम में युवराज ने अपनी मां का पूरा साथ दिया। युवराज ने आकांक्षा से यहां तक कहा कि उन्हें उनकी मां का कहना मानना चाहिए क्योंकि वह ही इस घर की सबसे बड़ी हैं।'

-स्वाति ने कहा कि, 'शबनम सिंह बहुत ही डोमिनेंट हैं। वह अपने फैसले सब पर थोपती हैं। जोरावर और आकांक्षा का हर फैसला शबनम सिंह पर ही निर्भर रहता था, जैसा वह कहती हैं, घर में उनकी ही मर्जी चलती है।'