संन्यास लेते वक्त भावुक हुए युवराज, 2-2 वर्ल्ड कप जीत के हीरो रहे युवी ने कही ये बातें

yuvraj singhन्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (10 जून): सीमित ओवरों के क्रिकेट में कभी टीम इंडिया के 'सुपर मैन' रहे युवराज सिंह ने घरेलू और अंतर्राष्टीय क्रिकेट को अलविदा कर दिया है। टीम इंडिया के दो-दो वर्ल्ड कप जीत के हीरो रहे 37 साल युवराज पिछले दो सालों से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बाहर हैं। उन्होंने अपना आखिरी वनडे और आखिरी अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच 2017 में खेला था। उसके बाद से उनकी टीम इंडिया में वापसी नहीं हो पाई है। जबकि टेस्ट क्रिकेट में तो 2012 के बाद उनकी कभी टीम में दोबारा वापसी नहीं हो सकी। युवराज सिंह ने 3 अक्टूबर 2000 में केन्या के खिलाफ नैरोबी में वनडे क्रिकेट के जरिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आगाज किया था। युवराज ने 2011 के वर्ल्ड कप में 9 मैच में 90.50 के औसत से 362 रन और 15 विकेट लिए थे। वे उस वर्ल्ड कप में प्लेयर ऑफ द सीरीज भी चुने गए थे। 2011 वर्ल्ड कप के दौरान युवराज कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। हालांकि, उन्होंने किसी को इस बात का पता नहीं चलने दिया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्वार्टर फाइनल से पहले डॉक्टरों ने उनको नहीं खेलने की सलाह दी थी, लेकिन वे न सिर्फ मैदान में उतरे, बल्कि भारत की जीत के हीरो भी रहे। उन्होंने उस मैच में 57 रन की पारी खेली थी।

2011 विश्व कप के हीरो रहे युवराज सिंह ने मुंबई में एक स्पेशल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर अपने संन्यास का ऐलान किया। संन्यास का ऐलान करते वक्त युवराज सिंह भावुक हो गए। उन्होंने एक बेहद ही भावुक संदेश में क्रिकेट के साथ अपने सफर का जिक्र करते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास का ऐलान किया। इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी हैजल और मां शबनम मौजूद थीं। अपने विदाई संदेश में युवी ने मीडिया को संबोधित करते हुए अपने क्रिकेटिंग करियर में आए हर एक उतार-चढ़ाव और अच्छी बुरी याद का जिक्र किया। युवराज सिंह ने कहा कि 'मैं बचपन से ही अपने पिता के नक्शेकदम पर चला और देश के लिए खेलने के उनके सपने का पीछा किया। मेरे फैन्स जिन्होंने हमेशा मेरा समर्थन किया, मैं उनका शुक्रिया अदा नहीं कर सकता। मेरे लिए 2011 वर्ल्ड कप जीतना, मैन ऑफ द सीरीज मिलना सपने की तरह था। इसके बाद मुझे कैंसर हो गया। यह आसमान से जमीन पर आने जैसा था। उस वक्त मेरा परिवार, मेरे फैन्स मेरे साथ थे।' साथ ही उन्होंने कहा कि '25 साल और 17 साल के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मेरे करियर के बाद अब मैंने आगे बढ़ने का फैसला कर लिया है। इस खेल ने मुझे सिखाया है कि कैसे लड़ें, कैसे गिरें, कैसे उठें और फिर कैसे आगे बढ़ें।'

टीम इंडिया में युवी के नाम से युवराज सिंह ने कहा 2011 का विश्वकप जीतना एक सपने की तरह था। उसके बाद मुझे कैंसर हो गया और इस दौरान मेरे फैन्स और परिवार साथ था। उन्होंने कहा कि कि 'मैंने कभी सोचा नहीं था भारत के लिए खेलूंगा लेकिन 2004 में मैंने लाहौर में पहला शतक लगाया और फिर टी20 विश्वकप में 6 गेंदों में 6 छक्के लगाना यादगार रहा। 2014 के टी20 विश्वकप का मैच मेरे लिए सबसे खराब अनुभव था और तब मुझे लगा था कि मेरे क्रिकेटिंग करियर का अंत हो गया है। युवराज सिंह ने आगे कहा कि 'मैंने हमेशा खुद पर भरोसा रखा और यह बात मायने नहीं रखती की दुनिया क्या कहती है। मैंने गांगुली की कप्तानी में करियर शुरू किया और सचिन, सहवाग, वीरू, गौतम जैसे मैच विनर्स के साथ खेला। हालांकि, जब रिटायरमेंट की बात आई तो मैं पिछले साल ही यह फैसला ले चुका था, सोचा जो टी-20 जीते हैं उसके बाद सन्यास लूं लेकिन सबकुछ जैसा सोचो वैसा नहीं होता।'

आपको बता दें कि युवराज सिंह ने अपना आखिरी टेस्ट 2012 और आखिरी इंटरनेशनल टी-20 2017 में खेला था। वहीं उन्होंने मुंबई इंडियंस के लिए आईपीएल का 12वां सत्र खेला था। आईपीएल 2019 में मुंबई की ओर से युवराज को कम ही मौके मिले। इस आईपीएल के दौरान जब युवी प्रैक्टिस के लिए वानखेड़े स्टेडियम पहुंचे थे, तो भावुक हो गए थे। स्टेडियम पहुंचकर युवी की 2011 विश्व कप की यादें ताजा हो गई। तब इसका एक वीडियो भी शेयर किया गया था।