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क्या आप अंधेरे में फोन इस्तेमाल करते है? तो जा सकती है आंखों की रोशनी-रिसर्च

आज कल की लाइफस्टाल में हमारे लिए टीवी जरुरत बन गया है। लोग आज कल किताबे कम पढ़ते है और टीवी से ज्ञान लेने में भरोसा रखते है। टीवी की नीली रोशनी हमारे आंखों के लिए बेहद घातक है। अब उससे ज्‍यादा घातक मोबाइल फोन की रोशनी है। मोबाइल अब हमारे लाइफ का हिस्‍सा है।

न्यूज 24 ब्यूरो, मुंबई(3 नवंबर):  आज कल की लाइफस्टाल में हमारे लिए टीवी जरुरत बन गया है। लोग आज कल किताबे कम पढ़ते है और टीवी से ज्ञान लेने में भरोसा रखते है। टीवी की नीली रोशनी हमारे आंखों के लिए बेहद घातक है। अब उससे ज्‍यादा घातक मोबाइल फोन की रोशनी है। मोबाइल अब हमारे लाइफ का  हिस्‍सा है। टीवी की पहुंच तो केवल ड्राइंग रूम तक थी, लेकिन मोबाइल की पहुंच अब बेड तक है। हम घंटों अंधेरे में स्‍मार्टफोन देखते रहते हैं और इसकी लत की वजह से आई स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है।

अंधेरे में स्‍मार्टफोन देखने की आदत बड़ों ही नहीं बच्‍चों को भी काफी नुकसान पहुंचाता है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आई स्ट्रोक और बच्चों में आंखें टेढ़ी होने का खतरा बढ़ जाता है। बता दें कि एक रिसर्च में एक व्यक्ति की आंखों की रोशनी स्‍मार्टफोन देखने की लत के कारण चली गई।

आई स्ट्रोक के लक्षण 

आई स्ट्रोक  से दृष्टि काफी कमजोर हो जाती है या फिर दिखना पूरी तरह से बंद हो जाता है।

मोबाइल फोन, टैब और लैपटॉप पर नजरें गड़ाए रहने से बच्चों की आंखों पर ज्यादा असर पड़ रहा है।

बच्चों की दूर की नजर कमजोर हो रही है. लगातार नजदीक से देखने के कारण आंखों पर जोर पड़ता है।

आंखों में रुखापन आ रहा है. इससे बच्चों की आंखें टेढ़ी होती जा रही हैं. चश्मे का नंबर बढ़ रहा है।

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