देश के युवा बनना चाहते हैं धोनी और कोहली, नहीं मिलता उन्हें मौका: SC

नई दिल्ली (26 अप्रैल): देश में ऐसे कई युवा खिलाड़ी हैं जो धोनी और कोहली बनना चाहते हैं लेकिन अगर कोई युवा क्रिकेट में अपना करियर बनाना चाहता है तो वो बीसीसीआई से अलग रहकर करियर नहीं बना सकता। इसलिए बीसीसीआई को सभी खिलाड़ियों को बराबर का दर्जा देना चाहिए ताकि वे अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकें। ये कहना है सुप्रिम कोर्ट का बीसीसीआई को।

सुप्रिम कोर्ट ने बीसीसीआई की खिंचाई करते हुए कहा कि बोर्ड समाजिक दायित्व का पालन कर रहा है। ऐसे में आपको अपने काम में निष्पक्ष, पारदर्शी और ईमानदार रहना चाहिए। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस टी एस ठाकुर की अगुवाई वाली पीठ ने कहा, 'देश में कई युवा क्रिकेट में अपना करियर बनाना चाहते हैं और इससे जुड़ी चकाचौंध के कारण धोनी और कोहली जैसा बनना चाहते हैं। अगर वे बीसीसीआई से नहीं जुड़े हैं तो उन्हें समान अवसर नहीं दिए जाते हैं। कई बार उन्हें शीर्ष पर बैठे व्यक्तियों द्वारा ही रोक दिया जाता है।'

मामले में एडवोकेट गोपाल सुब्रहमण्यम बने न्यायमित्र सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही इस मामले में वरिष्ठ एडवोकेट गोपाल सुब्रहमण्यम को न्यायमित्र भी नियुक्त किया और उनसे यह पता करने में मदद करने के लिए कहा कि जस्टिस आर एम लोढ़ा समिति की आमूलचूल ढांचागत बदलावों संबंधी सिफारिशों को कैसे लागू किया जाए। बीसीसीआई और अन्य बोर्ड इसका विरोध कर रहे हैं। पीठ में जस्टिस एफ एम आई कलिफुल्ला भी शामिल थे।