यहां जिस्म और उम्र देख कर लगती लड़कियों की बोली, इतनी ही 'वर्जिनिटी' की कीमत...

नई दिल्ली (6 जुलाई): भले ही इराक और सीरिया से आईएस के पैर उखड़ रहे हैं लेकिन अब भी हजारों यज़ीदी लड़कियां उनकी कैद में हैं। अपने खर्चे पूरे करने के लिए वो यज़ीदी लड़कियों के इश्तहार निकाल रहे हैं और उनकी बोलियां लगा रहे हैं। इश्तहार के लिए आईएस व्हाट्स एप और टेलिग्राम का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें यज़ीदी लडकियों और महिलाओं को उनकी उम्र और डील-डौल के हिसाब से कीमत तय होती है। 500 डॉलर से 20 हजार और 25 हजार डॉलर तक कीमत लगायी जाती है। हाल ही में आईएस के चंगुल से मुक्त कराये गये फल्लुजा से एक भी यज़ीदी लड़की का न मिलना एक गहरी चिंता का सबब बन गया है।

ऐसा माना जा रहा है कि आईएस ने सेक्स स्लेब बना कर रखी गयी लड़कियों को या तो दूसरी जगह पहुंचा दिया जहां से वो उनकी नीलामी कर रहे हैं या फिर उनको क़त्ल कर दिया गया होगा। अगस्त 2014 में सिंजर से हजारों यजीदियों के साथ सेक्स स्लेब बनाकर रखी गयी लामिया अजी बशर उन खुश नसीब लड़कियों मे से है आईएस की चंगुल से जिंदा भाग निकलने में कामयाब हो सकी। लामिया बताती है कि उसके माता-पिता को आईएस के आतंकियों ने उसी वक्त मार दिया था। उसकी 9 साल की छोटी बहन जो अब ग्यारह साल की हो चुकी है, अब भी आईएस की गिरफ्त में है। लामिया बताती है कि उसे रक्का ले जाकर आईएस के इराकी लड़ाके अबु मंसूर के हाथ बेचा गया।

अबु मंसूर उसे मारता-पीटता और जब इच्छा तब बलात्कार करता था। लामिया बताती है कि वो उसके चंगुल से भाग निकली, लेकिन आईएस ने सेक्स स्लेब लड़कियों के फोटो और उनके मालिकों की जानकारी व्हाट्स पर शेयर कर देते हैं। जैसे ही कोई लड़की बच कर भागती है वैसे आईएस के लड़ाके सभी चेकपोस्ट पर लड़की की फोटो और नाम के एलर्ट भेज देते हैं। इसलिए उनके चंगुल से निकल कर भागना बहुत मुश्किल होता है। उसे भी चेकपोस्ट पर पकड़ लिया गया वापस उसी नरक में भेज दिया गया। इसके बाद वो हथकडी से बांध कर रखने लगा। हथकडी सिर्फ उतनी देर के लिए खोलता जितनी देर वो बलात्कार करता था। मंसूर उसे लामिया को मोसूल ले गया और एक अन्य आतंकी के हाथ सौदा कर दिया।

दो महीने बाद ही उस आतंकी ने तीसरे शख्स के हाथ बेच दिया। तीसरा आतंकी कार बम और सुसाइड बेल्ट बनाता था। जब वो बलात्कार करके थक जाता था उसको सुसाइड बेल्ट बनाने के लिए मजबूर करता था। लामिया ने कई बार उसके चंगुल से भागने की कोशिश की। बार-बार भागन-पकड़ने से परेशान हो कर उसने भी एक छोटे कस्बे हवीज़ा में रहने वाले आईएस के डॉक्टर के हाथों उसका सौदा कर दिया। लामिया ने डॉक्टर से गुजारिश की और अपने रिश्तेदारों से फोन पर बात की। लामिया के चाचा ने एक तस्कर को 800 डॉलर दिये। उस तस्कर ने लामिया को बार्डर तक पहुंचा दिया।

लामिया के दो लड़कियां और थीं। उसमें से एक अलमास 8 साल की कैथरीन 20 साल की थी। लामिया ने बताया कि जब वो तीनों बार्डर सरकारी सेनाओं के कब्जे वाले इलाके की तरफ भाग रहीं थीं तभी आईएस की बिछाई बारूदी सुरंग पर कैथरीन का पैर पड़ गया। कैथरीन और अलमास मारी गयीं और वो घायल हो गयी। जब उसे होश आया तो वो अपने चाचा के घर में थी। उसकी सुरंग विस्फोट से उसकी दायीं आंख चली गयी। चेहरे पर तमाम जख्म हो गये, लेकिन वो जिंदा बच गयी। लामिया आजकल जर्मनी के एक शरणार्थी कैंप में है।