आधार कार्ड होने पर ही बुक कराया जा सकेगा रेल टिकट!

नई दिल्ली (6 जुलाई) :  अगर आपके पास आधार कार्ड नहीं हैं तो बनवा लें। आने वाले वक्त में ऐसा हो सकता है कि अगर आपके पास आधार कार्ड नहीं हो और आप ट्रेन की टिकट बुक कराने जाए और आपको मना कर दिया जाए। 'इंडिया टुडे' की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के सबसे बड़े बायोमीट्रिक आइडेंटिटी प्रोजेक्ट 'आधार' को देश में रेल यात्रा से जोड़ा जा सकता है।

सूत्रों के मुताबिक भारतीय रेलवे यात्री टिकट व्यवस्था को डेटाबेस योजना से जोड़ने की तैयारी में हैं। इसे सब्सिडी और अन्य छूटों पर होने वाले खर्च को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि इससे किसी के टिकट पर दूसरे के यात्रा करने की संभावना खत्म हो जाएगी। रेलवे अगर ऐसा कदम उठाता है तो ये सुप्रीम कोर्ट की पिछले साल दी व्यवस्था के अनुरूप नहीं होगा।  बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल कहा था कि आधार का इस्तेमाल केवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और एलपीजी कनेक्शन तक ही सीमित रहेगा।

सूत्रों के मुताबिक रेलवे इस योजना को दो चरणों मे लाने की तैयारी है। पहले चरण में सीनियर सिटीजन, स्वतंत्रता सेनानी, दिव्यांग, छात्रों और बेरोजगार युवकों को मिलने वाली छूट के लिए आधार नंबर बताना अनिवार्य होगा। अभी रेलवे 53 श्रेणियों में छूट प्रदान करता है। रेलवे मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इस संबंध में नीति का अनुमोदन 15 दिन में हो जाएगा।

दूसरे चरण में करीब दो महीने का वक्त लगेगा। इसमें टिकटिंग व्यवस्था को आधार कार्ड से जोड़ा जाएगा। इसका अर्थ होगा कि टिकट बुकिंग के वक्त यात्री को अपना यूनिक आइडेंटी नंबर बताना होगा। ये बुकिंग चाहे ऑनलाइन हो या आरक्षण टिकट काउंटर से। शुरू में आधार कार्ड को आरक्षित टिकटों के लिए अनिवार्य किया जाएगा। बाद में इसे अनारक्षित टिकटों पर भी लागू किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक इससे सही यात्रियों का यात्रा करना सुनिश्चित किया जा सकेगा। कोई किसी दूसरे के नाम पर यात्रा नहीं कर सकेगा।

योजना के मुताबिक आधार नंबर को टिकट पर प्रिंट किया जाएगा। यात्रा के दौरान टिकट पर उल्लेखित आधार नंबर को टीटी के पास मौजूद मोबाइल डिवाइसेज में डाला जाएगा। इससे आधार नंबर वाले व्यक्ति का फोटोग्राफ समेत पूरी जानकारी मोबाइल डिवाइज़ पर आ जाएगी। ऐसे में सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सही व्यक्ति ही यात्रा कर रहा है।

आकंड़ों के मुताबिक रेलवे को वर्ष 2015-16 में सामाजिक सेवा दायित्वों पर 34,000 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े थे। इसमें से 1600 करोड़ रुपए रेलवे यात्रा छूटों पर किया गया। इनमें से भी अधिकतर हिस्सा 1200 करोड़ रुपए सीनियर सिटीजंस को दी जाने वाली छूट पर किया गया। नियम के मुताबिक 60 वर्ष से ऊपर के पुरुष यात्रियों को किराए में 40 फीसदी की छूट दी जाती है। वहीं 58 वर्ष से ऊपर की महिला यात्रियों को 50 फीसदी किराए में छूट दी जाती है। दिव्यांगों और हृदयरोगियों को किराए में 75 फीसदी तक की छूट दी जाती है।