SHOCKING : 'नदियों के देश' भारत को विदेश से खरीदना पड़ेगा पीने का पानी!

नई दिल्ली (22 अप्रैल): नदियों का देश माने जाने वाले भारत में जिस तरह से भूमिगत जल के स्तर में कमी होती जा रही है, इसे देखते हुए आपको यह जानकर हैरानी नहीं होनी चाहिए कि जब देश को 2050 तक पीने के लिए पानी बाहर से आयात करना पड़े। आने वाले सालों में देश में जल का भंडार प्रति व्यक्ति 3,120 लीटर प्रति दिन ही रह जाएगा।

'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक, 2001 के आधार पर आज के आंकड़े दिखाते हैं कि कि देश में प्रति दिन-प्रति व्यक्ति भूमिगत जल की उपलब्धता घटकर 5,120 लीटर तक पहुंच चुकी है। यह स्तर 1951 में 14,180 लीटर हुआ करता था। 1991 में यह 1951 के भंडार के आधे से भी कम हो चुका था। ऐसा बताया गया कि आधार वर्ष के मुकाबले 2025 तक यह केवल 25 फीसदी ही रह जाएगा। 

सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के अध्ययन के आंकड़ों में चेतावनी दी गई है कि भूमिगत जल के दोहन की वर्तमान दर को देखते हुए यह भंडार 2050 तक केवल 22 फीसदी ही रह जाएगा।  

एक्सपर्ट्स का कहना है कि जमीन के भीतर के पानी के स्तर में कमी बारिश के पानी के संरक्षण के साधनों की बर्बादी का ही एक संकेत है। जिनमें तालाब, झीलें, कुएं, जागरुकता की कमी और ग्रीन कवर की कमी शामिल हैं।

कृत्रिम साधनों से भूमिगत जल के पुनर्भण्डारण के लिए बनाए गए सीजीडब्ल्यूबी के मास्टर प्लान में कहा गया है, "तेजी से होते विकास और भूमिगत जल के संसाधनों के कई उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल ने इसमें योगदान किया है। हालांकि, कृषि सिंचाई में हुई बढ़ोतरी, आर्थिक विकास और शहरी भारत में जीवन स्तर की गुणवत्ता में हुए प्रसार ने भूमिगत जल के स्तर में कमी की है। जो कि ग्रामीण इलाकों में 85 फीसदी घरेलू जरूरतों और 50 फीसदी शहरी जरूरतों के लिए संसाधन है। इसके अलावा देश में 50 फीसदी से भी ज्यादा सिंचाई की जरूरतों के लिए भी इस्तेमाल होता है।"

तेजी से बढ़ती जनसंख्या और मांग को देखते हुए वह दिन दूर नहीं जब प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता घटकर एक दिन के उपयोग मात्र के पानी की मात्रा तक ही रह जाए।