राजनीति छोड़ना चाहते थे सीएम योगी, इनके कहने पर बनाया सेवा का जरिया

लखनऊ(8 अक्टूबर): यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ एक समय राजनीति से अलग होना चाहते थे। 26 साल की उम्र में गोरखपुर का सांसद बनने वाले आदित्यनाथ ने इसका खुलासा एक वेबसाइट के कार्यक्रम में किया। 

- सीएम ने कहा, 'पहली बार सांसद बनने के 5-6 महीने बाद ही मैंने अपने गुरु से कहा कि राजनीति मुझे जंचती नहीं है। मेरे गुरु ने कहा कि पलायन मत करो। इसे सेवा का जरिया बनाओ। इसमें रमो मत। 1999 में जब मेरी जीत का अंतर महज 7 हजार का रह गया था, तो मुझे लगा कि मेरा निर्णय सही था, मुझे चुनाव नहीं लड़ना चाहिए।'

- योगी से जब यह पूछा गया कि उन्होंने गणित से बीएससी किया, उनकी गणित से विशेष रुचि की वजह क्या है? योगी ने कहा- 'अगर मेरी गणित में रुचि नहीं होती तो मैं राजनीति में कैसे आ पाता? चुनावी राजनीति तो गुणा भाग की ही है। मेरी रुचि यह जानने में थी कि विज्ञान की सीमाएं कहां तक है? पर जब यह जान लिया कि विज्ञान की सीमाएं सीमित हैं तो आध्यात्म का रास्ता चुन लिया।

- सीएम ने बताया कि कि जब गुरु महंत अवैद्धनाथ ने पहली बार योगी बनने को कहा था तो मैं भयभीत हो गया था। घर चला आया, पर जब वह बीमार पड़े तो उन्होंने मुझे बुलाया और कहा-मैं तुम्हें अपना शिष्य बनाना चाहता हूं तो मैं इनकार नहीं कर सका। नाथ संप्रदाय की काफी कठिन प्रक्रिया के बाद मैं योगी बना।

- योगी ने बताया कि जब वह कोटद्वार में बीएससी करने के लिए पहुंचे, तो एसएफआई से जुड़े उनके जीजाजी चाहते थे कि वह कॉमरेड बने। इस पर सीएम ने कहा, 'छात्र जीवन में कई तरह के विचारों से सामना होता है। हमारा सामना एसएफआई और एनएसयूआई से भी हुआ। पर मेरे जीवन का ध्येय राष्ट्र की सेवा था, इसलिए मैं एबीवीपी से जुड़ा।