पिता की मौत के बाद भी योगेश्वर का नहीं टूटा था हौसला

नई दिल्ली(21 अगस्त): रियो ओलंपिक का आज आखिरी दिन है। हरियाणा के सोनीपत के गांव भैंसवाल कलां का छोरा व देश की उम्मीद पहलवान योगेश्वर दत्त अब रियो के अखाड़े में उतरने जा रहा है। योगेश्वर पर पूरे देश की उम्मीद टिकी हुई है। जहां योगेश्वर ने लंदन ओलंपिक में 60 किग्रा भार वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। वहीं इस बार ब्राजील की मेजबानी में चल रहे रियो ओलंपिक में वह 65 किग्रा भारवर्ग में मुकाबले लड़ेगें। 

दुखों में भी नहीं टूटा योगी का हौंसला 

-देश के बच्चे-बच्चे की जुबान पर नाम पहलवान योगेश्वर दत्त पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। लेकिन दुख की घड़ी में भी योगी ने अपना हौंसला नहीं तोड़ा। जब दोहा में 2006 में एशियाड खेल चल रहे थे योगेश्वर के जाने के 9 दिन बाद ही अचानक पिता चल बसे।

- योगेश्वर पर दुख का पहाड़ टूट चुका था, क्योंकि उनको पहलवान बनाने में पिता ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। उस समय उनके घुटने में चोट भी लग गई। भावनात्मक और शारीरिक रूप से बुरी तरह से आहत होने के बाद भी उन्होंने कुश्ती जीती और देश के लिए कांस्य पदक लेकर आए। पहला गोल्ड मेडल 2003 में कॉमनवेल्थ गेम्स में आया। उसके बाद पदक कभी रुके नहीं। वर्ष 2013 में उन्हें पद्मश्री से अलंकृत किया गया। 2014 में ग्लासगो के कॉमनवेल्थ में वे फिर गोल्ड मेडल लेकर आए।

लंदन में जीता था मेडल

लंदन में योगेश्वर दत्त ने अपने देश के तिरेंगे को लहराने का काम किया था। भारत की ओर से कुश्ती में मेडल जीतने वाले तीसरे पहलवान हैं। सबसे पहले 1952 के ओलंपिक खेलों में भारत के खशब जाधव ने ब्रॉन्ज जीता था।  फिर 2008 के बीजिंग ओलंपिक में पहलवान सुशील कुमार ने ब्रॉन्ज जीता था और लंदन में 2012 में ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमाया। 

कुछ यूं चल रहा है योगी का सिक्का

योगी ने सबसे पहले 2008 के बीजिंग ओलिंपिक में भी भाग लिया था, लेकिन वह क्वार्टरफाइनल में हारकर बाहर हो गए थे। इसकी भरपाई उन्होंने लंदन ओलिंपिक 2012 में की और 60 किग्रा भार वर्ग में ब्रॉन्ज जीता। उनके नाम एशियाई खेलों में मेडल हैं। उन्होंने इंचियोन 2014 में 65 किग्रा भार वर्ग में एशियाई खेलों में गोल्ड जीता था। इससे पहले वह दोहा एशियाई खेल 2006 में 60 किलो भार वर्ग में ब्रॉन्ज जीत चुके थे।कॉमनवेल्थ खेलों में योगेश्वर के रिकॉर्ड का भारत में कोई सानी नहीं है। उन्होंने दिल्ली कॉमनवेल्थ खेल 2010 और ग्लास्गो कॉमनवेल्थ खेल 2014 में गोल्ड जीता था। योगेश्वर की उलब्धियों को देखते हुए उन्हें 2012 में राजीव गांधी खेल रत्न भी मिल चुका है।