यशवंत सिन्हा का अरुण जेटली पर वार, मैं नौकरी मांगता तो वह वित्त मंत्री नहीं होते

नई दिल्ली (29 सितंबर): भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा के लिखे लेख के बाद भाजपा में शीर्ष स्तर पर जुबानी जंग शुरू हो गई है। यशवंत सिन्हा के पक्ष में जहां भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा खुलकर सामने आ गए वहीं जेटली के पक्ष में पार्टी के बेड़ नेता खड़े हो गए हैं।   बता दें कि अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालत के लिए मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा करने वाले पूर्व वित्तमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा पर वित्त मंत्री जेटली ने गुरुवार को जवाबी हमला बोला था। जेटली ने सिन्हा को कहा 80 साल की उम्र में नौकरी चाहते हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली के 80 साल की उम्र में नौकरी मांगने के तंज पर पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने जवाब दिया है। 

यशवंत सिन्हा ने जेटली पर जोरदार हमला करते हुए कहा कि यदि मैं नौकरी मांगता तो अरुण जेटली आज उस स्थान पर नहीं होते, जहां वह हैं। देश में आर्थिक गिरावट के माहौल के लिए यशवंत सिन्हा द्वारा खुद को जिम्मेदार ठहराए जाने के जवाब में जेटली ने कहा था कि सिन्हा 80 साल की उम्र में नौकरी मांग रहे हैं। जेटली ने कहा था कि मैं इस स्थिति में नहीं हूं कि पूर्व वित्त मंत्री की हैसियत से अखबार में लेख लिखूं। 

जेटली के तंज का जवाब देते हुए सिन्हा ने कहा, 'सरकार स्थिति को समझने में पूरी तरह असफल है। असली चिंता यह है कि वह समस्या को समझने की बजाय खुद की तारीफ करने और अपनी ही पीठ थपथपाने में जुटी है।' सिन्हा ने खुद के मुकाबले उनके ही बेटे जयंत सिन्हा को बयानबाजी के लिए उतारने पर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह सही नहीं है। 

एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में सिन्हा ने कहा, 'जो यह कह रहे हैं कि यह मेरा निजी हमला है, वह गलत है। यदि अर्थव्यवस्था से जुड़ी कोई बात होगी तो उसके लिए वित्त मंत्री ही जिम्मेदार होंगे। इसके लिए गृह मंत्री जवाबदेह नहीं होंगे। मेरे बेटे जयंत सिन्हा को मेरे ही खिलाफ उतारकर सरकार मुद्दे से ध्यान हटाने का प्रयास कर रही है। मैं भी निजी हमले कर सकता हूं, लेकिन उनके जाल में फंसना नहीं चाहता।'

आपको बता दें कि उड्डयन मंत्री जयंत सिन्हा ने गुरुवार को एक अंग्रेजी अखबार में लेख लिखकर कहा था, 'भारतीय अर्थव्यवस्था की चुनौतियों को लेकर हाल ही में कई लेख लिखे गए हैं। दुर्भाग्य से ये लेख कुछ निश्चित तथ्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकालते हैं और सरकार की ओर से लागू किए गए मूलभूत सुधारों की उपेक्षा की गई है। ये बदलाव मामूली नहीं हैं।