इस डर के कारण बार-बार मसूद अजहर को बचा रहा है चीन

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (14 मार्च):
पुलवामा हमले को आज पूरा एक महीना हो गया और आज रात ही इस हमले का मास्टरमाइंड भारत के शिकंजे से बचने में काफी हद तक कामयाब हो गया। आतंक पर ड्रैगन का दोहरा रवैया एक बार फिर पाकिस्तान के इस पालतू आतंकवादी का रक्षा कवच बनकर खड़ा हो गया। यूएन सिक्योरिटी काउंसिंल में चीन के वीटो ने मसूद अजहर को एक बार फिर ग्लोबल टेररिस्ट घोषित होने से बचा लिया।

चीन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आतंक के खिलाफ उसकी बातें महज दिखावा हैं क्योंकि एक बार फिर उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो का इस्तेमाल किया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रेजॉल्यूशन 1267 के तहत मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन चीन के वीटो की वजह से यह पास नहीं हो सका। पिछले 10 सालों में चीन 4 बार ऐसा कर चुका है।

दरअसल, मसूद अजहर को बचाने के पीछे चीन की पाकिस्तान के लिए दोस्ती से ज्यादा अपनी आर्थिक हितों की चिंता है। चीन इस समय पाकिस्तान में BRI के तहत चीन सड़क, रेल और समुद्रीय मार्ग से एशिया, यूरोप और अफ्रीका में अपनी पहुंच बनाने में लगा है। उसको पता है कि अगर वह जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ कोई कदम उठाता है तो उसका बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) प्रभावित हो सकता है। चीन का CPEC प्रोजेक्ट पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है, जिसको जैश निशाना बना सकता है।

सीपीईसी ना केवल पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) और गिलिगिट-बालटिस्तान से होकर गुजरता है बल्कि खैबर पख्तूनख्वा के मनसेरा जिले में भी फैला है। खैबर पख्तूनख्वा में ही बालाकोट स्थित है, जहां पर कई आतंकी कैंप स्थित हैं। चीन ने हाल ही में बालाकोट के नजदीक सीपीईसी के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किया था। इसके अलावा, पाकिस्तान को चीन से जोड़ने वाला कराकोरम हाईवे भी मनसेरा से ही होकर गुजरता है।

सीपीईसी से जुड़ी परियोजनाओं में करीब 10,000 चीनी नागरिक काम कर रहे हैं, जिनकी सुरक्षा भी दांव पर लगी हुई है। हालांकि, बलूचिस्तान और सिंध प्रांत में चीनी नागरिकों और मजदूरों के खिलाफ आतंकी हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं जो चीन के लिए चिंता का सबब है। ऐसे में मसूद अजहर से दुश्मनी करके चीन किसी भी सूरत में आर्थिक नुकसान नहीं चाहता है। इसके अलावा पाकिस्तान के साथ अच्छे रिश्तों की वजह से जैश जैसे आतंकी संगठनों से सीपीईसी परियोजना और उसमें काम कर रहे हजारों चीनी नागरिकों को सुरक्षा मिल जाती है।