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वित्तीय संकट से जूझ रहा दुनिया का इकलौता 'संस्कृत' अखबार, कर रहा है ये अपील...

नई दिल्ली (10 जून): 14 जुलाई को कर्नाटक से छपने वाले दुनिया के इकलौते संस्कृत भाषा का अखबार 'सुधर्म' अपने 47 साल पूरे करेगा। लेकिन इस बार यह खुशी के अवसर के तौर पर नहीं आ रहा है। इसकी वजह है कि यह अखबार वित्तीय संकट के हालात से जूझ रहा है।

'स्कूपव्हूपडॉटकॉम' में आई रिपोर्ट के मुताबिक, इस संस्कृत अखबार अभी और कितने दिन चलेगा, इस बारे में अभी साफ नहीं है। लेकिन अखबार मालिक, केवी संपत कुमार (संपादक) और पत्नी एस जयलक्ष्मी ने कहा कि अखबार को काफी समर्थन की जरूरत है। लेकिन उनका धैर्य अब जवाब दे रहा है।

जयलक्ष्मी ने कहा, "सुधर्म राजस्व कमाने वाला व्यवसाय नहीं रह गया है। यह पत्रकारिता और संस्कृत के लिए हमारी खास रुचि का फल है।"

साल 2012 में यूपीए सरकार के समय में अखबार ने कहा था, "जबकि, ऐसे प्रकाशनों के लिए वित्त आरक्षित रहता है। लेकिन ना तो राज्य और ना ही केंद्र सहायता के लिए तैयार हैं।"

लेकिन मोदी सरकार के आने के बाद भी चीजें नहीं बदली हैं। जो संस्कृत के प्रचार प्रसार के लिए काफी प्रयासरत है। जयलक्ष्मी ने कहा, "एक साल पहले हमने मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी और प्रधानमंत्री मोदी को सहायता के लिए लिखा था। लेकिन हमें अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।"

अब उन्होंने अखबार में सार्वजनिक दान के लिए लोगों से अपील की है। जो सोशल मीडिया पर भी सामने आ रही है। इस प्रेस को संपत कुमार के पिता कालेले नाडादुर वारादराजा अइयंगर ने शुरू किया था। जो एक संस्कृत विद्वान थे।


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