कोरोना के बीच डराने लगा मंकीपॉक्स का वायरस, हरकत में आया डब्लूएचओ

विश्व अभी भी कोरोना महामारी से लड़ रहा है। आज भी कोविड का खतरा टला नही है ऐसे में मंकीपॉक्स का वायरस डराने लगा है। मंकीपॉक्स के बढ़ते मामले को देखते हुए डब्लूएओ भी हरकत में आ गया है।

कोरोना के बीच डराने लगा मंकीपॉक्स का वायरस, हरकत में आया डब्लूएचओ
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पल्लवी झा, नई दिल्ली: विश्व अभी भी कोरोना महामारी से लड़ रहा है। आज भी कोविड का खतरा टला नही है ऐसे में मंकीपॉक्स का वायरस डराने लगा है। मंकीपॉक्स के बढ़ते मामले को देखते हुए डब्लूएओ भी हरकत में आ गया है। पिछले कुछ दिनों से यूनाइटेड किंगडम और यूरोप के कई हिस्सों में मंकीपॉक्रस वायरस ख़तरनाक तरीके से पार पसार रहा है। यहां तक की नॉर्थ अमेरिका में भी इस वायरस का प्रकोप बढ़ रहा है। 




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इसी को देखते हुए भारत से कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी एयरपोर्ट्स और पोर्ट पर निगरानी बढ़ाने के लिए आदेश दिया है साथ ही वायरस के जांच को लेकर NCDC और ICMR सहित NIV पुणे को भी अलर्ट रहने का आदेश दिया है। स्वस्थ्य मंत्रालय ने ये आदेश दिया है की आगर कोई भी व्यक्ति सिम्पटम्स के साथ पाया जाये उसको तुरंत आईसोलेट करें और सैंपल NIV  पुणे भेज दें। वहीं तेज़ी से बढ़ते मामलों को देखते हुए WHO ने भी इमरजेंसी मीटिंग बुलायी है।


बताया जा रहा है कि इस व्यक्ति ने हाल ही में कनाडा की यात्रा की थी। इस साल अमेरिका में मंकीपॉक्स का यह पहला मामला है। इससे पहले यूके में 6 मई को मंकीपॉक्स का पहला मामला दर्ज किया था और तब से वहां संक्रमित लोगों की कुल संख्या नौ हो गई है। पुर्तगाल और स्पेन में भी मंकीपॉक्स के अन्य मामलों का पता चला है। अब तक मंकीपॉक्स अफ्रीका के बाहर केवल चार देशों में पाया गया था। जिसमें इटली, जर्मनी, स्पेन, पुर्तगाल शामिल है। 


चलिए जानते हैं कि मंकीपॉक्स क्या है, इसके लक्षण क्या हैं, यह कैसे फैलता है और कितना गंभीर हैं?


मंकीपॉक्स एक जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाला वायरस है, जिसमें स्मॉल पॉक्स जैसे लक्षणों होते हैं। हालांकि यह इलाज की दृष्टि से कम गंभीर है। 1980 में चेचक के उन्मूलन और बाद में स्मॉल पॉक्स के टीकाकरण की समाप्ति के साथ मंकीपॉक्स (Monkeypox) सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बेहद गंभीर समस्या बनकर उभरा है।  


कई जानवरों की प्रजातियों को मंकीपॉक्स वायरस के लिए जिम्मेदार माना गया है। इन जानवरों में रस्सी गिलहरी, पेड़ गिलहरी, गैम्बिया पाउच वाले चूहे, डर्मिस, गैर-मानव प्राइमेट और अन्य प्रजातियां शामिल हैं। मंकीपॉक्स वायरस के प्राकृतिक इतिहास पर अनिश्चितता बनी हुई है और इनके प्रकृति में बने रहने के कारणों की पहचान करने के लिए आगे के अध्ययन की आवश्यकता है




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मंकीपॉक्स के संक्रमण से लक्षणों की शुरुआत तक आमतौर पर 6 से 13 दिनों तक होती है, लेकिन यह 5 से 21 दिनों तक हो सकती है। बुखार, तेज सिरदर्द, लिम्फ नोड्स की सूजन, पीठ दर्द, मांसपेशियों में दर्द और एनर्जी की कमी जैसे लक्षण इसकी विशेषता हैं जो पहले स्मॉल पॉक्स की तरह ही नजर आते हैं। इसके साथ ही त्वचा का फटना आमतौर पर बुखार दिखने के 1-3 दिनों के भीतर शुरू हो जाता है। दाने गले के बजाय चेहरे और हाथ-पांव पर ज्यादा केंद्रित होते हैं। यह चेहरे और हाथों की हथेलियों और पैरों के तलवों को ज्यादा प्रभावित करता है।



यदि मंकीपॉक्स का शक है, तो स्वास्थ्य कर्मियों को एक उपयुक्त नमूना इकट्ठा करना चाहिए और इसे उचित क्षमता के साथ एक प्रयोगशाला में सुरक्षित रूप से पहुंचना चाहिए। मंकीपॉक्स की पुष्टि नमूने के प्रकार और गुणवत्ता और प्रयोगशाला परीक्षण के प्रकार पर निर्भर करती है। कारकों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और लोगों को उन उपायों के बारे में शिक्षित करना मंकीपॉक्स की मुख्य रोकथाम की रणनीति है। मंकीपॉक्स की रोकथाम और नियंत्रण के लिए टीकाकरण का आकलन करने के लिए अब स्टडी चल रही है।






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