रूस-यूक्रेन संघर्ष पर दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक खत्म, पीएम मोदी बोले- भारतीय छात्रों की सुरक्षा और निकासी ही सर्वोच्च प्राथमिकता

रूस-यूक्रेन तनाव के मुद्दे पर भारत की राजधानी दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक समाप्त हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली ये बैठक लगभग दो घंटे तक चली।

रूस-यूक्रेन संघर्ष पर दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक खत्म, पीएम मोदी बोले- भारतीय छात्रों की सुरक्षा और निकासी ही सर्वोच्च प्राथमिकता
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नई दिल्ली: रूस-यूक्रेन तनाव के मुद्दे पर भारत की राजधानी दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक समाप्त हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली ये बैठक लगभग दो घंटे तक चली। इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर समेत कई उच्चाधिकारी भी शामिल थे।


इस बैठक में प्रधानमंत्री ने सर्वोच्च प्राथमिकता के तौर पर भारतीय छात्रों की सुरक्षा और निकासी सुनिश्चित की। भारत सरकार के सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी एएनआई ने लिखा, 'निकासी में तेजी लाने के लिए यूक्रेन के पड़ोसी देशों के साथ और सहयोग बढ़ाया जाएगा।'



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इस बीच यूक्रेन में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए भारत सरकार ने 'ऑपरेशन गंगा' (Operation Ganga) शुरू किया है। इस संबंध में भारतीय विदेश सचिव हर्ष वी श्रृंगला ने रविवार को कई अहम जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने कहा- मैंने रूस और यूक्रेन के दोनों राजदूतों को अलग-अलग बुलाया, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर अपनी चिंताओं से अवगत कराया। मैंने उन स्थानों की जानकारी दी, जहां भारतीय नागरिक मौजूद हैं। दोनों राजदूतों ने हमारी चिंताओं पर ध्यान दिया और हमें भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का आश्वासन दिया।


श्रृंगला ने कहा- भारत सरकार ने यूक्रेन में फंसे हमारे नागरिकों को निकालने के लिए 'बहुआयामी' ऑपरेशन गंगा शुरू किया है। यह निकासी प्रक्रिया सरकारी खर्च पर होगी। अब तक ऑपरेशन गंगा के तहत, हमारे हजारों नागरिकों को रोमानी और हंगरी से बाहर निकाला गया है और अन्य हजारों को यूक्रेन से भूमि मार्गों से बाहर निकाला गया है। उनके लिए उड़ानों की व्यवस्था की गई है। हंगरी और रोमानिया के लिए सीमा पार करना अभी तक काम आया है, हालांकि, पोलैंड के लिए निकास बिंदु लाखों विदेशी नागरिकों के वहां से भागने की कोशिश करने के कारण बंद है। जो लोग हंगरी और रोमानिया की सीमाओं के पास हैं, उन्हें चरणों में उनके सीमा बिंदुओं की ओर निर्देशित किया जाता है।


बकौल श्रृंगला, 'कीव में हमारे दूतावास और हमारे मंत्रालय ने ये स्थिति आने से पहले कई परामर्श जारी किए थे। हमारे 4,000 नागरिक इन सलाहों के अनुसार संघर्ष से पहले चले गए थे। हमने अनुमान लगाया कि यूक्रेन में लगभग 15,000 नागरिक बचे हैं। चूंकि यूक्रेन में हवाई क्षेत्र बंद था, इसलिए हमने हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और रोमानिया से भूमि निकासी विकल्पों की पहचान की। विशिष्ट सीमा पार बिंदुओं की पहचान की गई और विदेश मंत्रालय ने निकासी प्रक्रिया में सहायता के लिए टीमों को तैनात किया था।




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