'मोदी-ट्रंप की केमिस्ट्री पर लगी हैं दुनिया भर की निगाहें'

नई दिल्ली (29 मार्च): भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की वन टू वन मुलाकात और संबंधों पर दुनिया भर की निगाहें हैं। इन दोनों की केमिस्ट्री से एशिया-पैसेफिक ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के भू-भौतिकी संबंध प्रभावित होंगे। अमेरिका के पूर्व उप राष्ट्रपति डिक चेनी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में जॉर्ज एफ बेकर प्रोफेसर ऑफ इकनॉमिक्स मार्टिन फेल्डस्टीन और बीसीजी के चेयरमैन हांस पॉल बर्कनर मानते हैं कि दोनों ही नेता प्रो-बिजनस हैं और भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड और सिक्यॉरिटी को लेकर सहयोग करने का अवसर है।


मार्टिन फेल्डस्टीन ने कहा है कि मोदी और ट्रंप दोनों 'एक ट्रैक पर हैं' और उनका मकसद भी एक जैसा है। उन्होंने कहा, अगर मैं प्रेजिडेंट ट्रंप होता और प्रधानमंत्री मोदी से मिलता तो मैं सोचता कि यह शख्स टैक्स रिफॉर्म कर रहा है। वह भारत में बिजनस को बढ़ावा दे रहा है। मैं भी अमेरिका में वही कर रहा हूं।’ वहीं चेनी ने कहा है कि मोदी और ट्रंप दोनों के एक जैसे हित हैं और उनके आपसी संबंध भी दुनिया के लिए काफी मायने रखेंगे।


एच-1बी वीजा मामले पर बर्कनर ने कहा कि इसमें यह संदेश दिया गया है कि अमेरिका में काम करने वाली भारतीय कंपनियों से दोनों देशों का फायदा है। उन्होंने कहा, 'भारतीय कंपनियों को यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि वे अपनी सर्विस के जरिये अमेरिकी कंपनियों की प्रॉडक्टिविटी बढ़ा रही हैं। वे कोचिंग और ट्रेनिंग के जरिये अमेरिकी लोगों की भी प्रॉडक्टिविटी में इजाफा कर रही हैं।' बर्कनर ने उम्मीद जताई कि एच1बी वीजा के मसले को जल्द सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'हम वीजा में 50 पर्सेंट की कटौती से अलग इस समस्या का कोई हल निकाल लेंगे। अगर अमेरिकी कंपनियों की ताकत बढ़ाने का तर्क दिया जाता है तो इससे काफी कुछ हासिल हो सकता है।' 


चेनी ने अमेरिका और भारत के बीच सुरक्षा मामले में सहयोग बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि चीन जिस तरह से अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा है, यह उसमें जरूरी हो जाता है। चेनी ने कहा, 'चीन एशिया में अमेरिका की जगह लेना चाहता है। वह साउथ चाइना सी में मिलिट्री बेस बनाना चाहता है। चीन बहुत अग्रेसिव है।' वहीं, मार्टिन ने बताया कि अमेरिका और उसके दोस्तों की सैन्य ताकत मजबूत होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'अमेरिका और उसके मित्र दोस्तों के लिए सैन्य ताकत को मजबूत रखना जरूरी है ताकि कोई चाइनीज लीडर हमें या हमारे दोस्तों को चुनौती न दे सके।'