नक्सलियों ने गिराई ढोलकाल पहाड़ी पर स्थित ऐतिहासिक गणेश प्रतिमा

दंतेवाड़ा(28 जनवरी): दंतेवाड़ा की ढोलकल पहाड़ी पर स्थित दुनियाभर में मशहूर गणेश प्रतिमा खाई में गिरकर खंडित हो गई। अपनी जगह पर न दिखने के बाद प्रतिमा के चोरी होने की अफवाह फैली थी। कहा जा रहा था कि इसे हैलिकॉप्टर के जरिए चाेरी कर लिया गया है। बाद में एसपी और जिला प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर प्रतिमा के गिरने की पुष्टि की।

- बता दें कि एक हजार साल पहले नागवंशी राजाओं ने यह प्रतिमा 3500 फीट की ऊंचाई पर स्थापित की थी। बस्तर के आईजी एसआरपी कल्लूरी के मुताबिक, पहाड़ी पर टूरिस्टों का आना-जाना बढ़ गया था, इसलिए नक्सलियों ने प्रतिमा खाई में गिरा दी।

- 26 जनवरी को जगदलपुुर से 20 लोग गणेश जी के दर्शन करने गए थे।- वहां उन्हें मूर्ति अपनी जगह पर मिली ही नहीं। उन्होंने पहाड़ी से उतरकर ढोलकल गांव के लोगों से पूछा। गांव वाले भी इससे अनजान निकले।

- ग्रामीणों ने दो दिन पहले हैलिकॉप्टर के चक्कर लगाने की बात बताई, जिससे ऊपर ही ऊपर चोरी करने लेने की आशंका जताई जा रही थी।

- अफवाह फैलने के बाद कलेक्टर सौरभ कुमार, एसपी कमललोचन कश्यप और जिला प्रशासन के सदस्य मौके पर पहुंचे तो खाई में प्रतिमा गिरे होने की पुष्टि की। प्रतिमा को ड्रोन कैमरे से ढूंढा जा सका।

- प्रतिमा गिरी और किस हद तक खंडित हुई है, इस बारे में अभी स्थिति साफ नहीं है।

- सीनियर ऑर्कियोलॉजिस्ट और स्टेट ऑर्कियोलॉजी के एडवाइजर डॉ. अरुण कुमार शर्मा के मुताबिक, पत्थर में क्रैक होने के कारण मूर्ति गिर गई होगी।

- बस्तर के आईजी ने इस घटना में नक्सलियों का हाथ होने की बात कही है।

- प्रतिमा के टुकड़े 60 से 70 फीट नीचे गिरे मिले।

- छह फीट ऊंची ये प्रतिमा बनावट की दृष्टि से अनोखी और कलात्मक है। यह 100 किलो वजनी है और सैंडस्टोन से बनी है।

- गणपति की इस प्रतिमा में ऊपरी दांये हाथ में फरसा, ऊपरी बांये हाथ में टूटा हुआ एक दंत, नीचे दांये हाथ में अभय मुद्रा में अक्षमाला है। बाएं हाथ में मोदक है।

- ऑर्कियोलॉजिस्ट्स के मुताबिक इस तरह की प्रतिमा बस्तर क्षेत्र में और कहीं नहीं मिलती।

- प्रतिमा के हाथ में फरसा होने के चलते इसे दंतेवाड़ा का क्षेत्ररक्षक माना जाता है।

- इस प्रतिमा की स्थापना अब से करीब हजार साल पहले छिंदक राजवंश के नागवंशी राजाओं ने की थी।

- प्रतिमा में गणपति के पेट पर नाग उकेरा हुआ है।