#WCFDay2 : 'दिया अपनी अना को जो हमने उठा, वो परदा जो बीच में था ना रहा'

नई दिल्ली (12 मार्च): राजधानी दिल्ली में पिछले दो दिनों से रुक रुक कर हो रही बारिश से प्रभावित होने के बाद भी यमुना के तट पर 'वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल' का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार को इस भव्य आयोजन का दूसरा दिन था। यह कार्यक्रम आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के 'आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन' के सौजन्य से किया जा रहा है।

दूसरे दिन के कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, विदेशमंत्री सुषमा स्वराज और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी शामिल होने मंच पर पहुंचे हैं।शुरुआत एचएच स्वातंत्रानंद महाराज ने के उद्बोधन के साथ हुई। कार्यक्रम में दुनिया के अन्य देशों के साथ इस्त्राइल, सीरिया और पाकिस्तान के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। सभी समुदायों के बीच सदभाव का संदेश प्रसारित करने के साथ भारत और पाकिस्तान के बीच भी सदभाव की पहल की गई। 

एक तरफ गृहमंत्री और विदेशमंत्री ने अपने उद्बोधन में सद्भाव की बात की, वहीं पाकिस्तान से आए इस्लामी विद्वान मुफ्ती मोहम्मद सईद खान ने भी इसके लिए अपने विचार रखे। उन्होंने दुनिया से 'अना' यानि घमंड को दूर करने की गुजारिश भी की।

गौरतलब है, तीन दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन, शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन कार्यक्रम में खुद उपस्थित थे। इसके अलावा देश और दुनिया के तमाम सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नेता एक ही मंच पर इकट्ठे हो रहे हैं।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह का संबोधन

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल में कहा, "विश्व में आज तक इससे बड़ा कोई भी कल्चर फेस्टिवल नहीं हुआ है। जैसा राजधानी दिल्ली में देखने को मिला है।"

श्री श्री की प्रशंसा करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि "भारतीय संस्कृति को विश्व में गौरव दिलाने का काम गुरुदेव ने किया है।" इसके बाद उन्होंने भारत की विविधता का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के मनीषियों ने पूरे विश्व को विराट सोच के साथ जोड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत में ही सबसे ज्यादा विश्वास के लोग रहते हैं। भारत में इस्लाम और ईसाई धर्मों के कई पंथ मिलते हैं, जो विश्व के दूसरे राष्ट्रों में नहीं मिलते। इन सभी को समाहित भारत की संस्कृति ने किया है।

विदेशमंत्री सुषमा स्वराज का उद्बोधन

विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कहा कि "सत्य एक ही है। विद्वान उसे भिन्न भिन्न तरीके से कहते हैं। वो सत्य है- मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना। यह सार है सब लोगों के कहने का। भारत एक धर्म निरपेक्ष देश है। धर्म निरपेक्षता का मतलब होता है- सर्वधर्म समभाव।"

उन्होंने कहा, "धर्म-निरपेक्षता का मतलब है- एक हिंदू अच्छा हिंदू हो, एक मुसलमान अच्छा मुसलमान, एक सिख अच्छा सिख हो और एक ईसाई अच्छा ईसाई। और सभी अपनी आस्था के साथ एक दूसरे के धर्म का सम्मान करें।"

कार्यक्रम की भव्यता और व्यापकता के लिए उन्होंने श्री श्री रविशंकर की क्षमता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, कि श्री श्री एक ऐसे व्यक्ति हैं जो पूरी दुनिया में इस स्तर का कार्यक्रम कर सकते हैं। इसलिए हम सौभाग्यशाली हैं कि ऐसे गुरुदेव का जन्म भारत में हुआ है।

उन्होंने कहा कि हिंसाग्रस्त दुनिया में इस कार्यक्रम के जरिए शांति और सद्भाव का महान संदेश दिया गया है। 

श्री श्री रविशंकर का उद्बोधन

"जब समुदायों के बीच में तनाव बढ़ जाता है, जब करोड़ों लोगों के बीच तनाव बढ़ जाता है तो एक पुकार उठती है- 'सर्वे जनः सुखिनः भवेत'।"

श्री श्री रविशंकर ने गृहमंत्री और विदेशमंत्री के साथ दुनिया भर से आए संत समाज का स्वागत करते हुए संबोधित करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम संस्कृति का ओलम्पिक्स है। उन्होंने कहा, "मेरा परिवार 7 अरब लोगों का है। 1.8 अरब लोगों ने पहले दिन का आयोजन दुनिया भर में देखा है।"

उन्होंने कहा कि आध्यात्म और कला लोगों को जोड़ते है। जब विचार मिलते हैं तो एक पथ मिलता है तब हम सभी आगे साथ चलते हैं। पर्यावरण और यमुना की सफाई के मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने कहा, "पर्यावरण हमारा प्राण है। हम सुनते थे कि यमुना मां बच्चे को नहलाती थी, लेकिन आज यमुना मां को नहलाने का, साफ करने का वक्त आ गया है। यमुना की सफाई हमारा कर्तव्य है।"

इस्लामी विद्वान मुफ्ती मोहम्मद सईद खान का उद्बोधन

पाकिस्तान से आए इस्लामी विद्वान मुफ्ती मोहम्मद सईद खान ने कहा कि वह शुक्रगुज़ार हैं कि उन्हें बुलाने के काबिल समझा। सईद खान मदनी ट्रस्ट के संस्थापक हैं। उन्होंने कहा, कि दुनिया भर के लोगों को मोहब्बत का पैगाम अपनाना होगा।

सईद खान ने कहा हम सबको ये जान लेना चाहिए कि दुनिया में तमाम मसाएल सुलझ सकते हैं। लेकिन 'अना (घमंड)' का मसला ऐसा खराब है कि ये हल नहीं होता और दुनिया में जितने दानिशमंद थे, उन सबने यही कहा- 

"दिया अपनी अना को जो हमने उठा, वो परदा जो बीच में था ना रहा।

ना वो परदे में अब रहे ना परदानशी, कोई दूसरा उसके सिवा ना रहा"

शेरी रहमान, सांसद, वाइस प्रेसीडेंट, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी, पाकिस्तान का उद्बोधन

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की वाइस प्रेसीडेंट शेरी रहमान भी शनिवार को आयोजन में पूरे उत्साह के साथ शरीक हुईं। उन्होंने दुनिया भर में फैली 'शरणार्थी समस्या' से निपटने के लिए 'वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल' जैसे आयोजन की जरूरत और भूमिका की तारीफ की। उन्होंने आयोजकों को इसके लिए बधाई दी।

वरिष्ठ वकील रामजेठमलानी का उद्बोधन

रामजेठमलानी ने कहा, "मैं खुद ही एक पापी हूं लेकिन आज मैं संतों के बीच विवशता में हूं।" उन्होंने आगे कहा कि आज मैं संतों के सामने खुद को आत्मसमर्पित करता हूं।

दूसरे दिन की झलकियां

बता दें, शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आयोजन को 'कला का कुंभ मेला' कहा था। दूसरे दिन भी कई विधाओं के कलाकार हजारों की संख्या में यहां इकट्ठे हुए हैं। तस्वीरों में आप भी देखिए कार्यक्रम की कुछ झलकियां-

 

सामूहिक ओडिशी नृत्य की झलकियां

8500 संगीतकारों की सामूहिक प्रस्तुति, 50 वाद्यों का वादन

सामूहिक सितार वादन

155 देशों के लोगों ने की सामूहिक गुरु वंदना

'मरूनी' नृत्य का प्रदर्शन करते 350 नर्तक। यह सिक्किम की सबसे पुरानी और लोकप्रिय नृत्य शैली है।

धर्म गुरु का स्वागत करते श्री श्री रविशंकर

मनीष सिसोदिया, उप-मुख्यमंत्री, दिल्ली

राजवरोत्यम समपंथन, संसद में विपक्ष के नेता, श्रीलंका

थाईलैंड के 150 नर्तकों के खोन डांस की प्रस्तुति 

सामूहिक गुडुम बाजा 

दर्शकों का विहंगम दृश्य

चीनी कलाकारों का समूहगान

आयोजन में मौजूद दुनिया भर आए लोग

भव्य मंच

एचएच गैनी गुरबचन सिंह, अकाल तख्त जत्थेदार

संत समाज

कार्यक्रम में आए जगतगुरु ने कहा, "हम हिंदू सम्मेलनों, राम जन्म भूमि की सभाओं में जाते रहे हैं, लेकिन हमने इतनी बड़ी सभा देखी ही नहीं।"