वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में हारे प्रणीत, मगर ब्रॉन्ज़ जीत रचा इतिहास

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(24 अगस्त): भारतीय शटलर बी साई प्रणीत को बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में हार के सामना करना पड़ा। प्रणीत को दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी जापान के केंतो मोमोता ने लगातार गेमों में हरा दिया जिससे भारतीय शटलर को टूर्नमेंट में ब्रॉन्ज से संतोष करना पड़ा। इस हार के बावजूद प्रणीत ने अपना नाम रेकॉर्ड बुक में दर्ज करा लिया और वह 36 साल बाद इस प्रतिष्ठित टूर्नमेंट में पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष शटलर हैं।

19वीं रैंकिंग के प्रणीत को मोमोता के खिलाफ 13-21, 8-21 से हार झेलनी पड़ी। यह मुकाबला 42 मिनट तक चला। 16वीं वरीयता प्राप्त प्रणीत ने क्वॉर्टर फाइनल में इंडोनेशिया के जॉनाटन क्रिस्टी को सीधे गेमों में मात दी थी लेकिन वह सेमीफाइनल में अपनी लय बरकरार नहीं रख सके। प्रणीत को अब ब्रॉन्ज मेडल मिलेगा। केंतो मोमोता के खिलाफ प्रणीत की यह लगातार चौथी हार है। मोमोता ने इसी साल प्रणीत को जापान ओपन और सिंगापुर ओपन में हराया था। पिछले साल भी वर्ल्ड चैंपियनशिप में मोमोता ने प्रणीत को लगातार गेमों में मात दी थी।

प्रणीत ने हालांकि अच्छी शुरुआत कर 5-3 की बढ़त बनाई लेकिन मोमोता ने ब्रेक तक इसे 11-10 कर दिया। जल्द ही चार अंक जुटाकर 15-10 से आगे हो गए। प्रणीत ने इसके बाद कई अनफोर्स्ड गलतियां की जिससे मोमोता ने अंतर 18-12 कर दिया। प्रणीत की गलती से जापानी खिलाड़ी ने पहला गेम अपने नाम किया। दूसरे गेम में दोनों 2-2 की बराबरी पर थे लेकिन भारतीय खिलाड़ी मोमोता के तेज तर्रार शॉट का जवाब नहीं दे सके और 2-9 से पीछे हो गए। ब्रेक तक मोमोता 11-3 से आगे थे। उन्होंने जल्द ही इसे 15-5 कर दिया। प्रणीत के बैकहैंड से मोमोता ने 19-8 बढ़त बना ली और जल्द ही जीत हासिल की।

इसी साल अर्जुन पुरस्कार के लिए चुने गए दुनिया में 19वें नंबर के शटलर प्रणीत ने एशियन गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट क्रिस्टी को हराया। वह 1983 के बाद इस प्रतिष्ठित टूर्नमेंट में पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष शटलर हैं। दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण वर्ल्ड चैंपियनशिप में पुरुष एकल में पदक जीतने वाले पहले भारतीय थे। उन्होंने 1983 वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।जापान के स्टार और मौजूदा वर्ल्ड रैंकिंग में नंबर-1 शटलर मोमोता के खिलाफ प्रणीत ने अभी तक 6 में से केवल 2 ही मुकाबले जीते हैं।