जानिए, वर्कर्स यूनियन क्यों कर रही है प्रियंका की कंपनी का बॉयकॉट

नई दिल्ली (17 मार्च): जनवरी में एक खबर आई थी कि प्रियंका चोपड़ा की प्रोडक्शन कम्पनी ने कथित तौर पर एक एड की शूटिंग के लिए जिन वर्कर्स को हायर किया। उन्हें उनके काम के बदले पैसों का भुगतान नहीं किया गया। यह एड फिल्म पिछले साल अप्रैल मई में शूट की गई थी। अब खबर आई है कि वर्कर्स यूनियन ने इस प्रोडक्शन कम्पनी का बहिष्कार करने का फैसला किया है, जबतक कि कंपनी बकाया रकम का भुगतान नहीं करती।

'मिड-डे' की रिपोर्ट के मुताबिक, बताया जा रहा है, कि कुल बकाया रकम 36 लाख रुपए है। जिसमें से 20 लाख रुपए क्लियर कर दिए गए हैं। बकाया रकम को क्यों रोका गया, उसके कारण केवल उन्हें ही पता हैं। इसके लिए पिछले साल दिसंबर में दो बार बिल भेजा गया। लेकिन उन्होंने इसके लिए अभी भी कोई जवाब नहीं दिया है।

इस मामले में प्रियंका की टिप्पणी नहीं मिल सकी है। मजदूर यूनियन सहयोगी और फिल्म स्टूडियो सेटिंग के जनरल सेक्रेटरी गंगेश्वर श्रीवास्तव ने बताया, "यह लगभग एक साल हो गया है कि हमारे सदस्यों ने प्रियंका चोपड़ा के पर्पल पेबल पिक्चर्स (पीपीपी) को अपनी सेवाएं दी थीं। जिसके लिए पेमेंट अभी भी रिलीज़ नहीं की गई। उन्हें दो बार रिमाइंडर भेजे जाने के बाद प्रियंका की आंटी और कंपनी में शामिल दो लोग- ईशान दत्ता और अमित विज हमसे मिलने आए थे। उन्होंने हमें 16 लाख रुपए जल्दी ही क्लियर करने के लिए कहा। हालांकि, आर्ट डायरेक्टर के 5 लाख रुपए उन्होंने दिए। लेकिन वर्कर्स का क्या? अब हमारे पास कोई विकल्प नहीं है, पीपीपी को नॉन-कोऑपरेशन नोटिस भेजने के बजाय।"

इससे पहले प्रोडक्शन कम्पनी के दावा किया था कि उनके पास आर्ट डायरेक्टर/सेट डिजाइनर के साथ एक ऑल-इन्क्लूसिव कॉन्ट्रैक्ट था। जैसा कि इन्व्यॉइस में लिखा गया था। इसलिए वे वर्कर्स के लिए पेमेंट करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। एक ऑफीशियल ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि पैसों का भुगतान सीधे आर्ट डायरेक्टर को किया गया था।

इंडियन मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन (आईएमपीपीए) के सेक्रेटरी अनिल नागरथ ने बताया, "पीपीपी ने आर्ट डायरेक्टर को पेमेंट किया है लेकिन वर्कर्स को नहीं। जारी की गई रकम में 5 लाख रुपए का एक चेक आईएमपीपीए के ऑफिस में है, लेकिन आर्ट डायरेक्टर इसके लिए दावा करने के लिए नहीं आए हैं। अब वर्कर्स पीपीपी को परेशान कर रहे हैं। ये सीधे तौर पर यह जबरन वसूली करने का रैकेट है। वर्कर्स ऐसे आर्ट डायरेक्टर के साथ काम ही क्यों कर रहे हैं?"