'अलगाववादियों और आजादी की मांग करने वालों से बात नहीं करेगी केंद्र सरकार'

नई दिल्ली ( 28 अप्रैल ): केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह कश्मीर में जारी अशांति को शांत करने के लिए अलगाववादी नेताओं या वैसे लोगों से बातचीत नहीं करेगी जो भारत से 'आजादी' की मांग करते हैं।


केंद्र ने पैलेट गन के इस्तेमाल के खिलाफ जम्मू और कश्मीर बार एसोसिएशन की तरफ से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट से यह बाते कहीं। एसोसिएशन चाहता है कि केंद्र हुर्रियत नेताओं से बातचीत करे। इस पर केंद्र ने कहा कि वह केवल उन्हीं लोगों के साथ बातचीत के लिए तैयार है जो कि जनता के प्रतिनिधि बनकर उनकी तरफ से सरकार के साथ बातचीत करने की कानूनी वैधता रखते हैं।


केंद्र की मोदी सरकार ने बातचीत की संभावनाओं को लेकर अपना पक्ष साफ करते हुए देश की सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि वह बातचीत के लिए तो तैयार है, लेकिन भारत से आजादी चाहने वालों और अलग हो जाने की मांग करने वालों के साथ वह किसी तरह का विचार विमर्श नहीं करेगी।


बार एसोसिएशन का कहना था कि केंद्र इस बातचीत में हुर्रियत के नेताओं को भी शामिल करे और संवैधानिक दायरे के अंदर रहकर बातचीत करने की शर्त छोड़ दे।


इस पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर घाटी में सेना और सुरक्षा बलों द्वारा उग्र भीड़ पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर अहम टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा है कि अगर कश्मीर में लोग और उनके प्रतिनिधि शांति कायम करने की पहल करते हैं, तो वह इस मामले में आगे की बातचीत करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देगा।

कोर्ट ने कहा कि अगर कश्मीरी आवाम की तरफ से विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी न करने का आश्वासन दिया जाए, तो वह CRPF और पुलिस को अगले 2 हफ्तों तक पैलेट गन्स का इस्तेमाल नहीं करने की हिदायत देगा।

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर बार असोसिएशन के लीडर्स से कहा कि वह राज्य के मौजूदा तनाव को खत्म करने और हालात सामान्य करने के मद्देनजर ऐसे लोगों का नाम बताएं, जो कि कश्मीरी जनता के प्रतिनिधि के तौर पर केंद्र सरकार के साथ बातचीत कर सकते हैं।

दरअसल जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के बार असोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर पैलेट गन्स के इस्तेमाल पर रोक लगाने की अपील की थी।