'जिम्मेदारी ना निभाने वाले मर्द से तलाक ले सकती है औरत'

नई दिल्ली (18 जून): पिछले महीने काउंसिल ऑफ इस्लामिक आइडियॉलॉजी (सीआईआई) की तरफ से एक विवादित बयान आया था। सीआईआई ने कहा था कि मर्दों को अपनी बीवियों की हल्की पिटाई की अनुमति होनी चाहिए। जिसके बाद संस्था की काफी आलोचना हुई थी। हाल ही में सीआईआई के चेयरमैन मौलाना मोहम्मद खान शेरानी ने बीबीसी को एक इंटरव्यू दिया। जिसमें उन्होंने काउंसिल के सुझावों की वकालत की है।

शेरानी ने कहा, "ये सुझाव कुरान और सुन्नाह, पैगम्बर मोहम्मद के दिए सबक के मुताबिक ही हैं। कोई भी इसपर विवाद नहीं कर सकता।"

पाकिस्तानी अखबार 'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, शेरानी ने काउंसिल के सुझावों को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा, "जब हम औरतों से जुड़े एक बिल का मसौदा बनाते हैं, तो हमें हर तरह की परिस्थिति को ध्यान में रखना होता है। अगर एक औरत अपनी शादी की जिम्मेदारी नहीं पूरी करती, तो पहले आप उसके सलाह दें। अगर वह काम नहीं करती तो आप उसके रिश्तेदारों से परामर्श करें। अगर वह भी काम नहीं करता, तो आप बिस्तर में उसका त्याग कर दें। अगर ये सब काम नहीं करता, तो हल्की पिटाई की मंजूरी है।"

आलोचना पर प्रतिक्रिया करते हुए कि ऐसे सुझाव मर्दों को उनकी बीवियों का शोषण करने की खुली छूट देते हैं, शेरानी ने कहा, "तो आप मुझे बताइए, तो इस मसले का क्या हल है? अगर एक औरत सारे विकल्प अपनाने के बाद सलाह पर ध्यान नहीं देती, रिश्तेदारों की नहीं सुनती, तब क्या किया जाना चाहिए?"

जब उनसे पूछा गया कि अगर अगर एक मर्द अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करता, तो एक औरत को क्या करना चाहिए? इसपर सीआईआई चेयरमैन ने कहा, "पहले वह परिवार के किसी व्यक्ति को मसले को सुलझाने के लिए शामिल कर सकती है। लेकिन अगर आखिर में वे महसूस करते हैं कि वे साथ नहीं रह सकते, तो उसे (औरत को) यह अधिकार है कि वह तलाक ले ले।"

हालांकि, काउंसिल के सुझावों पर पाकिस्तान के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में भी काफी नाराजगी फैला दी है। लेकिन, शेरानी ने पुनर्विचार करने से इनकार कर दिया है। शेरानी ने कहा, "समाज मीडिया नहीं है। ये दो अलग चीजें हैं और हम सुझावों पर पुनर्विचार नहीं करेंगे। ये पाक कुरान के मुताबिक है, आप किसी को पाक कुरान पर पुनर्विचार करने के लिए नहीं कह सकते।" 

पिछले महीने जब मीडिया और कार्यकर्ताओं ने सीआईआई के सुझावों पर गुस्से का इजहार किया, तो शेरानी ने अपना रुख थोड़ा नरम कर दिया। उन्होंने कहा कि धर्म में हिंसा की इज़ाजत नहीं है। उन्होंने कहा था, "हमारे प्रस्ताव (औरतों की पिटाई पर) को हिंसा से जोड़ने की कोशिश ना करें। हल्की पिटाई का मतलब हिंसा नहीं है।"