महिलाओं के काज़ी बनने पर होने लगा विरोध

नई दिल्ली (8 फरवरी): शनि शिंगणापुर, सबरीमाला, हाजी अली दरगाह में महिलाओं की एंट्री पर बहस के बीच एक और विवाद खड़ा हो गया है। राजस्थान में पहली बार दो महिलाएं काज़ी बनी हैं यानी अब वो प्रदेश में निकाह पढ़ने और मेहर जैसे मामलों में काम करेंगी। इससे पहले की इसकी शुरुआत होती, इसके विरोध में आवाज बुलंद हो गई है।

अब तक आपने निकाह में सिर्फ पुरुष काज़ी ही देखा होगा, लेकिन अब राजस्थान में ऐसा नहीं होगा। क्योंकि पहली बार यहां दो महिलाएं काज़ी बनी हैं। आरा और अफरोज़ बेगम नाम की इन दोनों महिलाओं ने काज़ी बनने के लिए बकायदा कोर्स किया है। उन्होंने मुंबई के दारुल-उलूम-ए-निस्वान से 2 साल की ट्रेनिंग की और काज़ियत का सर्टिफिकेट हासिल किया। इसके बाद वो आधिकारिक तौर पर काज़ी जहां आरा और काज़ी अफरोज़ बेगम बन गई हैं। अब वो निकाह, तलाक और मेहर जैसे मामलों में काम करेंगी।

हालांकि इससे पहले की ये नई शुरुआत हो पाती, कुछ उलेमाओं ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। महिला काज़ियों के मुताबिक महिलाओं को इंसाफ मिल सके, इसके लिए उन्होंने काज़ी बनने की ट्रेनिंग ली है। वहीं उलेमाओं की दलील है कि ट्रेनिंग लेनी अलग बात है लेकिन महिलाएं काज़ी नहीं बन सकतीं।