जब ईस्ट इंडिया कंपनी को इस कारण भारत से लौटना पड़ा था खाली हाथ

नई दिल्ली (14 अगस्त): जिस हिंदुस्तान को हम जानते हैं उसका अतीत 500 साल पुराना है। वो वक्त जब भारत में ब्रिटेन की ईस्ट इंडिया कंपनी ने पैर रखे। जो निशान ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत की ज़मीन पर छोड़े वो आज तक मिटे नहीं हैं।

साल 1608: - अंग्रेज़ व्यापारी विलियम हॉकिन्स ईस्ट इंडिया कंपनी का जहाज़ 'हेक्टर' लेकर गुजरात में सूरत के तट पर पहुंचा। - उस वक्त हिंदुस्तान पर मुग़ल बादशाह जहांगीर की सल्तनत कायम थी। - विलियम हॉकिन्स व्यापार करने के मक़सद से भारत आया था, लेकिन उसे पुर्तगालियों के ज़बर्दस्त विद्रोह का सामना करना पड़ा। - कई मुश्किलों का सामना करने के बाद विलियम हॉकिन्स 1 साल बाद साल 1609 में आगरा पहुंचा। - आगरा उस वक्त मुगलों की राजधानी थी, जहां उसकी मुलाकात मुगल बादशाह जहांगीर से हुई। - जहांगीर विलासितापूर्ण जीवन जीता था और विलियम हॉकिन्स भी एक नंबर का शराबी था। - दोनों में खूब बनी और विलियम हॉकिन्स को बादशाह के दरबार में जगह मिल गई, जहांगीर ने उसे नाम दिया इंग्लिश ख़ान - विलियम हॉकिन्स ने जहांगीर से सूरत में फैक्ट्री खोलने की इजाज़त मांगी, लेकिन जहांगीर को पुर्तगालियों पर अटूट भरोसा था। - पुर्तगालियों के दबाव की वजह से हॉकिन्स को फैक्ट्री खोलने की इजाज़त नहीं मिल सकी। - आख़िरकार 2 साल बाद साल 1611 में विलियम हॉकिन्स निराश होकर ब्रिटेन वापस लौट गया।