सरकार से नाराज मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, कहा...

नई दिल्‍ली (17 अप्रैल): ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने प्रेस कांफ्रेंस करके बोर्ड के कुछ फैसले सार्वजनिक किए हैं। इसमें उसने साफ तौर पर कहा कि इस्लामिक शरीयत की हिफाजत करने में वह पीछे नहीं हटेगा। बोर्ड ने सरकार को पर्सनल ला बोर्ड के मामलों में दखल न देने की अपील की है। इसके अलावा बोर्ड तीन तलाक, हलाला और एक से ज्यादा शादियों के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखेगा।

भारत शायद दुनिया का अकेला ऐसा देश है, जहां एक मुसलमान मर्द अपनी बीवी को कुछ ही सेकेंडों में सिर्फ़ तीन बार तलाक़ कहकर तलाक़ दे सकता है। कई इस्लामिक देशों में ट्रिपल तलाक पर पाबन्दी है। पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्की, ट्यूनीशिया, अलजीरिया, ईराक, ईरान, इंडोनेशिया में रोक लगा दी गई थी। पाकिस्तान में तो इस पर 1961 में रोक लगा दी गई थी, जब फेमिली लॉ आर्डिनेंस लागू किया गया था। इसके तहत हर शादी की रिजिस्ट्री और तलाक से पहले सुलह की कोशिशें एक सरकारी अधिकारी के सामने ज़रूरी हैं।

दूसरी शादी पर मलेशिया और ब्रुनेई में रोक है और तुर्की, मिस्त्र, सूडान, ईराक और पाकिस्तान में यह सख्त कायदों के बाद ही हो सकती है। कई देशों में तो पति-पत्नी के बीच सुलह करवाने के लिए मध्यस्थता परिषदों और न्यायिक हस्तक्षेपों का भी प्रावधान है, लेकिन भारत में स्थिति इससे अलग है। मुस्लिम पर्सनल लॉ अभी भी इस तरह के ट्रिपल तलाक की अनुमति देता है।

वीडियो:

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