कांग्रेस मुक्त भारत होने से बचाएंगीं प्रियंका ?


नई दिल्ली (19 मई): तो ये था पांच राज्यों के नतीजों से निकला देश की राजनीति का क्रक्स। आज पांच और राज्यों के चुनावी नतीजे आ गए और दिल्ली के 45 डिग्री के पारे ने कांग्रेस के सूबों में फिर से सूखा ला दिया। कांग्रेस के हाथ से दो और राज्यों की कुर्सी खिसक गई। ना असम में सत्ता हाथ आई, ना केरल में। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में गठबंधन करके भी कांग्रेस कुछ बड़ा नहीं कर पाई। अब देश में सिर्फ छह राज्य बचे हैं, जहां कांग्रेस का राज है। बीजेपी सिर्फ असम जीतकर बल्लियों उछल रही है। कांग्रेस मुक्त भारत के दावों पर दम ठोंक रही है और तब देश की सबसे पुरानी पार्टी के भीतर आवाज उठने लगी है। प्रियंका लाओ-कांग्रेस बचाओ।

बंगाल में ममता का फूल खिला है। तमिलनाडु में अम्मा के जादू से सत्ता की पत्ती और हरी हुई। असम में बीजेपी का कमल ऐतिहासिक तौर पर पहली बार फूला और इन सबके बीच कांग्रेस की बची खुची उम्मीदें भी सूख कर कांटा हो गईं। सुबह आठ बजे से जैसे ही देश में चुनावी राज्यों के रुझान सामने आने शुरु हुए, असम की तस्वीर देख बीजेपी का खेमा खिलखिलाने लगा था। बीजेपी दफ्तर में प्रधानमंत्री मोदी जब पहुंचे तो उनका ऐसे स्वागत हो रहा था, जैसे देश में दोबारा सबसे बड़े चुनाव पार्टी ने जीत लिए हों। पश्चिम बंगाल में ममता की आंधी चलने से टीएमसी के समर्थक होली मनाने लगे। तमिलनाडु में अम्मा की जीत को आभास होते ही समर्थक नतमस्तक होने लगे थे और जश्न के इन्हीं रंगों ने दिल्ली में कांग्रेस के मुख्यालय को रंगहीन, समर्थकहीन, ध्वनिहीन दफ्तर में तब्दील कर दिया था।

देश के पूर्व में असम, दक्षिण में केरल से भी कांग्रेस को जनता आउट जो कर दिया। हालत ये है कि कभी देश के ज्यादातर राज्यों में सत्ता की कुर्सी अपने हाथ में रखने वाली सवा सौ साल पुरानी पार्टी के पास सिर्फ उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मिजोरम, मणिपुर और मेघालय जैसे छोटे राज्य ही बचे हैं। यही वजह है कि लोकसभा चुनावों में कांग्रेस मुक्त भारत का नारा देने वाले नरेंद्र मोदी की पार्टी ने जीता तो सिर्फ असम ही है। लेकिन ये हल्ला मचाने में जरा भी देरी नहीं की, कि अब कांग्रेस मुक्त भारत होने ही वाला है।

लगातार चुनावी नतीजों में कांग्रेस की पतली होती हालत के कारण ही अब पार्टी के भीतर आवाज उठाई जाने लगी है। कहा जाने लगा है कि पार्टी को देश को कांग्रेस मुक्त होने से रोकने के लिए जरूरी है कि प्रियंका गांधी की एंट्री कराई जाए। प्रियंका को सक्रिय राजनीति में लाने की मांग हर उस मौके पर उठती है, जब भी कांग्रेस किसी चुनाव में मुंह की खाती है। लेकिन हर बार ये मांग उठकर रह भर जाती है। अब कांग्रेस के हाथ में सिर्फ देश के छह राज्य ही बचे हैं। इसीलिए प्रियंका की सक्रियता में पार्टी के लिए संजीवनी तलाशने लगे हैं हाथ के सिपाही।

उत्तर प्रदेश में अगले साल चुनाव होने हैं। जहां कांग्रेस के चाणक्य बने प्रशांत किशोर दावा है कि खुलकर कह चुके हैं कि प्रियंका को सक्रियता अपनी बढ़ानी होगी। सिर्फ अमेठी-रायबरेली तक सीमित रहने से कांग्रेस में जान नहीं फूंकी जा सकती। आंकड़े कहते हैं कि बीजेपी के राज में देश के 9 राज्य हैं। जिसके तहत देश की 36 फीसदी आबादी आती है। सहयोगियों के साथ NDA के राज में 13 राज्य आते हैं। जिसके तहत देश की 43 फीसदी आती है। क्षेत्रीय दलों के राज में देश की 41 फीसदी जनता है। जबकि 7 फीसदी से कम जनता वाले 6 राज्यों पर देश की सबसे पुरानी पार्टी का शासन बचा है।

देश में सबसे ज्यादा वक्त तक शासन करने वाली पार्टी कांग्रेस के लिए अब आत्ममंथन का वो दौर आ चुका है, जहां उसके सामने चुनौतियां ज्यादा और मौके कम हैं। लेकिन सच ये भी है राजनीति में वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता। तो क्या कांग्रेस प्रियंका को मैदान में लाकर पार्टी में संजीवनी फूंकेंगीं ?