वकीलों की गुंडागर्दी पर खामोश क्यों है दिल्ली पुलिस?

वरुण सिन्हा/प्रशांत देव नई दिल्ली (17 फरवरी): जेएनयू विवाद में आज तो हद हो गई। देशभक्ति का चोला पहने कुछ वकीलों ने कोर्ट परिसर में जमकर गुंडागर्दी की। कन्हैया समर्थक वकीलों को तो पीटा ही, न्यूज 24 की ओबी वैन पर भी निशाना साधा। कानून की किताब पढ़े वकीलों ने कई घंटे तक कानून की सरेआम धज्जियां उड़ाई। बाद में पेशी पर जाते वक्त पटियाला हाउस कोर्ट परिसर में ही कन्हैया कुमार पर वकीलों ने हमला कर दिया।

पूरे हंगामे के बाद सबसे ज्यादा सवाल दिल्ली पुलिस पर उठ रहे है। आखिर कैसे पुलिस की मौजूदगी में वकील गुंडागर्दी करते रहे है और पुलिस तमाशा देखती रही। मामला बढ़ा तो सुप्रीम कोर्ट ने भी पुलिस को कड़ी फटकार लगाई और पूछा कि पुलिस के रहते कैसे हिंसा हुई। सुप्रीम कोर्ट ने जायजा लेने के लिए कपिल सिब्बल के नेतृत्व में 5 वकीलों को भी पटियाला हाउस कोर्ट भेजा।

पुलिस कन्हैया के साथ मारपीट की बात से इनकार कर रही है और आरोपी वकीलों को समन भेजने की बात कर रही है। उधर कोर्ट ने कन्हैया कुमार को 2 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दिल्ली पुलिस अभी ये भी कह रही है कि वो कन्हैया जमानत का वो विरोध नहीं करेगी। सवाल ये है कि जब कन्हैया के खिलाफ सबूत दावा करने वाली दिल्ली पुलिस ऐसा क्यों कर रही है?

पूरे मामले पर सियासत जोरों पर है। उधर 8 दिन के बाद भी देशद्रोही नारों के असली आरोपी उमर खालिद को पुलिस पकड़ नहीं पाई है। कहीं इसके पीछे कोई सियासी वजह तो नहीं है। सरकार के विरोधी पूरे मामलों को जम्मू-कश्मीर की सियासत से जोड़कर देख रहे हैं। उधर जेएनयू विवाद की आंच जाधवपुर विश्वविद्याल तक पहुंच गई है। खबर है कि 18 विश्वविद्यालयों में ऐसी घटनाएं करने की योजना बनाई गई थी जिसके बाद से ये भी सवाल उठ रहा है कि आखिर विश्वविद्यालयों का माहौल खराब कौन करना चाह रहा है?