पैनिक बटन को लेकर पैनिक क्यूं? जानिए अहम बातें

प्रीति सिंह, नई दिल्ली (7 मई) : मोदी सरकार ने खासकर महिलाओं के लिए एक काबिले-तारीफ कदम उठाया है। वो कदम है पैनिक बटन। 2017 से भारत में बिकने वाले मोबाइल फोन में पैनिक बटन और जीपीएस लगा होगा। फीचर फोन्स में कंपनियों को जीपीएस लगाना होगा और कीपैड में 5 या 9 को इमर्जेंसी बटन बनाना होगा। स्मार्टफोन्स में भी कंपनियों को अलग से एक बटन लगाना होगा, जो इमरजेंसी बटन के तौर पर काम करेगा।

पैनिक बटन को लेकर हमने कई लोगों से बात की। इनमें महिलाएं ओर पुरुष दोनों शामिल थे। इनसे बात करने पर पता चला कि अब भी पैनिक बटन को लेकर कई तरह के सवाल लोगों के जेहन में हैं। मसलन,

पैनिक बटन कब प्रेस करना है?   

नोएडा के एक स्कूल में पढ़ाने वाली टीचर रंजना मल्लिक का कहना है कि उन्हें 'पैनिक बटन' नाम से लगता है कि किसी भी तरह की मुसीबत के वक्त यह दबाना है। पर तब क्या होगा, जब कोई मुसीबत के वक्त यह बटन दबाए और पुलिस या प्रशासन को लगे कि उस शख्स का इमरजेंसी कॉल महत्वपूर्ण है भी या नहीं ।

मदद कितनी देर में पहुंचेगी?

काम के लिए बिहार से दिल्ली आईं स्मिता सिंह का कहना है इमरजेंसी में जरूरी है कि वक्त मदद पर पहुंचे, वरना उसका कोई मतलब नहीं। अगर हेल्पलाइन से जवाब नहीं आता है या बहुत देर लग जाती है तो पैनिक बटन मोबाइल फोन में बेकार का बटन बनकर रह जाएगा। शहरी इलाकों में तो जल्द मदद मुहैया करवाई जा सकती है। ग्रामीण इलाकों में कैसे काम किया जाएगा, ये स्पष्ट होना चाहिए।

क्या यह बटन ज़ीरो बैलंस होने पर काम करेगा? 

प्रीपेड फोन इस्तेमाल करने वाली ज्ञानेश्वरी शर्मा का कहना है कि तब क्या होगा अगर मेरे फोन का बैलंस खत्म है, नेटवर्क कवरेज नहीं है या इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं है? क्या तब भी पैनिक बटन काम करेगा?

इंटरनेशनल ब्रैंड तैयार होंगे? 

दिल्ली में पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट आकाश कुमार का कहना है कि वो इटरनेशनल ब्रैंड के मोबाइल ही इस्तेमाल करते है तो सरकार के इस आदेश को सभी ब्रैंड फॉलो करेंगे। ज्यादातर भारतीय ब्रैंड्स ने तो इसके लिए हामी भर दी है, मगर सरकार ऐपल और सैमसंग जैसे बड़े ब्रैंड्स से यह काम कैसे करवाएगी?

वक्त पर सहायता मुहैया कराने की जिम्मेदारी किसकी होगी?

दिल्ली के ही रहने वाले रमना हल्देकर का कहना है कि अगर सिस्टम को मॉनिटर नहीं किया गया तो जल्द ही लोगों का इस सर्विस से भरोसा उठ जाएगा। इस पर सरकार का नजरिया क्या है ये स्पष्ट होना चाहिए।

उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार इस पैनिक बटन को अमली जामा पहनाते वक्त इन सवालों पर जरूर गौर करेगी ताकि लोग ज्यादा से ज्यादा इस बटन का लाभ उठा सके।

(लेखिका- प्रीति सिह)