'नुकसान' की भरपाई के लिए नॉर्थ ईस्ट बहुत 'खास'?

कुंदन सिंह, नई दिल्ली (13 जुलाई): बीजेपी के लिए नॉर्थ ईस्ट बहुत अहम है। असम के बाद बीजेपी अब पूर्वोंतर के दूसरे राज्यों की ओर तेजी से देख रही है। दरअसल, ये बीजेपी की एक खास रणनीति है। पार्टी 2019 लोकसभा चुनाव में यूपी जैसे राज्यों में नुकसान की भरपाई के लिए नॉर्थ ईस्ट प्लान पर आगे बढ़ रही है। 

ये इत्तेफाक है जिस वक्त सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश के मामले में मोदी सरकार को झटका दिया उसी वक्त बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह गुवाहाटी में पार्टी का नार्थ ईस्ट में विस्तार करने वाले सम्मेलन में मौजूद रहे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की जोड़ी ने उत्तर पूर्व के राज्यों में एनडीए के कुनबे को बढ़ाने के लिए कोशिशें तेज कर दी हैं।

बीजेपी उत्तर-पूर्व के आठ राज्यों की नौ छोटी पार्टियों का गठबंधन करने जा रही है। इसके लिए बीजेपी ने असम के कद्दवार नेता हेमंत विश्व शर्मा को NEDA यानि नार्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक एलांयस की कमान सौंपी है। नीडा बीजेपी के साथ उत्तर पूर्व की छोटी छोटी पार्टियों का गठबंधन होगा।

अब सवाल उठता है कि बीजेपी के नार्थ ईस्ट को इतनी तवज्जो देने की वजह क्या है? दरअसल नार्थ ईस्ट में लोकसभा की कुल 25 सीटे हैं जिसमें 2014 की मोदी लहर में पहली बार बीजेपी को 7 सीटें मिली। बीजेपी छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन कर इस आंकडे को आसानी से बढ़ा सकती है। 2019 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अगर उत्तरी भारत में कुछ सीटों का नुकसान होता है तो उसकी भरपाई नार्थ ईस्ट और दक्षिण की कुछ सीटों से की जा सके।

असम में बीजेपी गठबंधन सरकार बनने और अरुणाचल प्रदेश में सरकार बनाने की कामयाबी के बाद बीजेपी की उम्मीदों को पंख लग गए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एक झटका जरुर दिया है।