...तो इसलिए कुरुक्षेत्र में ही लड़ा गया था महाभारत का युद्ध

नई दिल्ली (8 फरवरी): महाभारत के युद्ध के बारे में लगभग सभी जानते हैं। लेकिन क्या कोई ये जानता है कि आखिर कुरुक्षेत्र में ही यह युद्ध क्यों लड़ा गया। तो आइए जानते हैं आखिर क्यों यहीं पर हुआ था महाभारत का युद्ध...

महाभारत के अनुसार राजा कुरु ने जिस धरती को बार-बार जोता उस भूमि को कुरुक्षेत्र कहा गया। राजा कुरु को भगवान इंद्र से वरदान प्राप्त था कि जो भी आदमी इस भूमि पर युद्ध करते हुए मरेगा उसे स्वर्ग की प्राप्ति होगी। माना जाता है कि इसी कारण से महाभारत का युद्ध यहां पर लड़ा गया। 

कुरु को कैसे मिला वरदान महाभारत के अनुसार जब कुरु इस भूमि की जुताई कर रहे थे। तभी भगवान इन्द्र वहां आए और उन्होंने पूछा कि आप ऐसा क्यों कर रहे हो। जवाब में कुरु ने अपनी इच्छा बताई। कुरु ने कहा कि मैं चाहता हूं कि व्यक्ति इस स्थान पर मारा जाए, वह पुण्य लोक में जाए। हालांकि भगवान उनकी बात को हंसी में उड़ाते हुए स्वर्गलोक चले गए। जब यह बात अन्य देवताओं को पता चली तो उन्होंने कहा कि अगर संभव हो तो कुरु को अपने पक्ष में कर लो। इसके बाद भगवान इंद्र खुद धरती पर गए और कुरु को वरदान दिया कि कोई भी पशु, पक्षी या मनुष्य निराहार रहकर या युद्ध करके इस स्थान पर मारा जायेगा तो वह स्वर्ग का भागी होगा। ये बात भीष्म, कृष्ण आदि सभी जानते थे, इसलिए महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में लड़ा गया।

कुरुक्षेत्र का महत्व नारद पुराण में आया है कि ग्रहों, नक्षत्रों एवं तारागणों को कालगति से (आकाश से) नीचे गिर पड़ने का भय है, किन्तु वे, जो कुरुक्षेत्र में मरते हैं पुन: पृथ्वी पर नहीं गिरते, अर्थात् वे पुन:जन्म नहीं लेते। भगवद्गीता के प्रथम श्लोक में कुरुक्षेत्र को धर्मक्षेत्र कहा गया है।