उत्तर प्रदेश के लिए BJP में अब कौन?

अशोक तिवारी, नई दिल्ली (14 जुलाई): यूपी के महाभारत की तीन बड़ी पार्टियां यानी कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बीएसपी ने अपने चेहरे का ऐलान कर दिया है। लेकिन, बीजेपी ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोते हैं। आखिर, बीजेपी के अंदर क्या चल रहा है? 

यूपी के महाभारत में खड़ी तीन बड़ी पार्टियों ने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को आगे कर दिया है। समाजवादी पार्टी में अखिलेश यादव चेहरा हैं, तो बीएसपी में मायावती और कांग्रेस ने अब शीला दीक्षित को आगे कर दिया है। लेकिन, कई राउंड के मंथन के बाद भी बीजेपी में किसी चेहरे पर फाइनल मुहर नहीं लग पायी है। 

ज्यादार मुद्दों पर खुलकर बोलने वाले बीजेपी के नेता भी इस सवाल का जवाब देने से लगातार बच रहे हैं। यूपी में जातीय समीकरण देखते हुए बीजेपी ने ग्राउंड लेबल पर तगड़ी फिल्डिंग बिछा रही है। दरअसल, यूपी बीजेपी के सामने एक बड़ा चेहरा राजनाथ सिंह हैं। लेकिन, वो वापस यूपी नहीं लौटना चाहते। राजनीतिक विश्लेषक भी मानते हैं कि यूपी बीजेपी में चेहरे का संकट है।

राजनीतिक विश्लेषक सुभाष मिश्रा ने कहा, "6 महीना प्रदेश अध्यक्ष खोजने में लगा, राजनाथ और कल्याण सिंह के जाने के बाद अब यूपी बीजेपी के पास कोई चेहरा नहीं है। नोएडा से सांसद और केंद्र में मंत्री महेश शर्मा भी एक विकल्प हैं। उनकी भाषा भी हिंदूवादी संगठनों को पसंद आती हैं और यूपी के ब्राह्मण वोटरों को खींचने में भी मददगार साबित हो सकते हैं। वहीं, योगी आदित्य नाथ भी सूबे की सोशल इंजीनियरिंग में फिट बैठते हैं। लेकिन, पिछले कुछ सालों से जिस तरह की बोली योगी बोल रहे हैं। उससे बीजेपी का एक बडा वोट बैंक बिदक सकता है।" 

मुरली मनोहर जोशी और कलराज मिश्र की राह में उम्र आड़े आ रही है। इलाहाबाद कार्यकारिणी के बाद युवा वरूण गांधी के पक्ष में नारेबाजी ने उनका नंबर घटा दिया। मतलब, बीजेपी लगातार यही हिसाब लगाने में जुटी है कि किसी को चेहरा बनाया जाए या नहीं बनाया जाए? और बनाया जाए तो फिर किसे?