सूखा नहीं खराब सिस्टम से मर रहा है देश!

नई दिल्ली (4 मई): एक ऐसी ख़बर जिसके जानकर आप भी ये सोचने को मजबूर हो जाएंगे कि हमारे देश में अन्नदाता के साथ कितना भद्दा मजाक होता है। यूपी के बांदा में भूख से तड़प-तड़प कर एक किसान की मौत हो गई, लेकिन हद तो तब हो गई जब अफसरों ने भूमिहीन किसान की मौत के बाद उसके घर राशन पहुंचवा दिया।

बुंदेलखंड में भी लोग सूखे से त्राही-त्राही कर रहे हैं। जमीन बंजर हो चुकी है। 75 बीघा तक का किसान भूखों मरने के लिए मजबूर है। धीरे-धीरे लोग बुंदेलखंड छोड़ कर रोजी-रोटी की तलाश में देश के दूसरे हिस्सों के लिए गाड़ी पकड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के बांदा में अगर एक किसान भूख की वजह से मर गया तो राजस्थान में गायें चारे-पानी की कमी की वजह से रोज़ दम तोड़ रही हैं और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के लिए लाखों लीटर पानी मिट्टी में बहा दिया जाता है। गाय पर पिछले दिनों देश में कितनी राजनीति हुई, ये आपको दोबारा बताने की जरूरत नहीं है। बीजेपी शासित सूबें में गायों की पानी-चारे की कमी से मौत की खबर पर सिस्टम की नींद तब टूटती है, जब मीडिया में खबरें आती हैं।

मौत तो महाराष्‍ट्र में भी हुई है। जहां पानी की कमी से जुझ रहे लातूर में एक महिला ने तब दम तोड़ दिया, जब वो तपती दुपहरी में कई किलोमीटर चलकर कुएं से पानी भरने गई थी। इस मौत पर भी नेताओं की आवाज दबी हुई है। इस मौत का भी जिम्मेदार क्या सिर्फ सूखे को माना जाए या फिर सिस्टम को? जो लाख दावों के बावजूद अब तक लातूर के लोगों को जरूरत भर का पानी भी मुहैय्या नहीं करा पा रहा है।

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