कौन हैं इरोम और क्यों बैठी हैं भूख हड़ताल पर...

नई दिल्ली (26 जुलाई): मणिपुर में 16 साल से सशस्त्र बल विशेष अधिनियम के ख़िलाफ़ भूख हड़ताल कर रही मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला अपना उपवास तोड़ेंगी। उन्होंने 9 अगस्त को भूख हड़ताल ख़त्म करने और मणिपुर विधानसभा के चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया है।

इरोम शर्मिला नवंबर 2000 से आफ़्सपा (सशस्त्र बल विशेष अधिनियम) के ख़िलाफ़ भूख हड़ताल पर हैं। अनशन के दौरान उन्हें कई बार अरेस्ट किया गया और जबर्दस्ती नैजल टयूब के जरिए खाना भी खिलाया गया। लेकिन उन्होंने अपनी जिद नहीं छोड़ी थी।

अपनी इच्छा के बारे में कोर्ट को भी बताया...

- इरोम शर्मिला को हर 15 दिन में मणिपुर की स्थानीय अदालत में पेश होना पड़ता है और उन्होंने ये जानकारी मेजिस्ट्रेट के सामने दी है। - इरोम ने अदालत में कहा, "किसी भी राजनीतिक दल ने मेरे लोगों की आफ़्सपा हटाने की मांग को नहीं उठाया। - इसीलिए मैंने ये विरोध ख़त्म करने और 2017 के असेंबली चुनावों की तैयारी करने का फ़ैसला किया है। - मैं 9 अगस्त को अदालत में अपनी अगली पेशी के समय भूख हड़ताल ख़त्म कर दूंगी।'' - 44 साल की शर्मिला न केवल अगले साल विधानसभा चुनाव में भाग लेंगी बल्कि वो अब शादी भी करना चाहती हैं।

कौन हैं इरोम: - आयरन लेडी इरोम का जन्‍म 14 मार्च 1972 में हुआ था। - इरोम मणिपुर से आर्म्‍ड फोर्स स्‍पेशल पावर एक्‍ट 1958, जिसे सशस्‍त्र बल विशेषाधिकार कानून को हटाए जाने की मांग पर  2 नवंबर 2000 से आजतक वो भूख हड़ताल पर हैं। - इस भूख हड़ताल के तीसरे दिन सरकार ने इरोम शर्मिला को गिरफ्तार कर लिया। उन्‍होंने जब भूख हड़ताल की शुरुआत की थी, वे 28 साल की युवा थीं। - कुछ लोगों को लगा था कि यह कदम एक युवा ने भावुकता में उठाया है, लेकिन समय के साथ इरोम शर्मिला के इस संघर्ष की सच्चाई लोगों के सामने आती गई। आज वह 44 साल की हो चुकी हैं। -वे आर्म्ड फोर्सेज़ स्पेशल पॉवर्स एक्ट 'अफस्पा' AFSPA  हटाए जाने की मांग को लेकर 2 नवंबर 2000 से आज तक अनशन पर हैं। - अफस्पा के तहत सेना को मणिपुर में अतिरिक्त शक्तियां मिली हुई हैं। - इरोम शर्मिला के अनशन शुरू करने से 10 दिन पहले ही कथित रूप से असम राइफल्स के सैनिकों ने 10 लोगों को गोलियों से मार डाला था, जिनमें दो बच्चे भी शामिल थे। - 2000 में उस समय अनशन के तीसरे दिन सरकार ने इरोम को अरेस्ट कर लिया था। - इरोम को कई साल से नाक में डली ट्यूब के ज़रिये जबरन खिलाया जा रहा है - उनके नाम पर अबतक दो रिकॉर्ड दर्ज हो चुके हैं। पहला सबसे लंबी भूख हड़ताल करने और दूसरा सबसे ज्‍यादा बार जेल से रिहा होने का रिकॉर्ड दर्ज है। - 2014 में अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस के मौके पर उन्‍हें एमएसएन ने वूमन आइकन ऑफ इंडिया का खिताब दिया था। - इरोम शर्मिला ने 1000 शब्दों में एक लंबी ‘बर्थ’ शीर्षक से एक कविता लिखी थी। - यह कविता ‘आइरन इरोम टू जर्नी- व्हेयर द एबनार्मल इज नार्मल’ नामक एक किताब में छपी थी। इस कविता में उन्‍होंने अपने लंबे संघर्ष के बारे में बताया है। - साल 2014 में दिल्ली के जंतर मंतर पर आमरण अनशन करने के लिए उन पर साल 2013 में सुसाइड की कोशिश को लेकर ट्रायल चला था। - बाद में कोर्ट ने उन्हें इस आरोप से बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इस बात के सबूत नहीं है कि उनका यह प्रदर्शन एक सुसाइड एक्ट है।

क्या है AFSPA?

आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट (अफस्पा) को साल 1958 में संसद ने पारित किया था। इसके तहत, सेना को किसी भी व्‍यक्ति को बिना कोई वारंट के तशाली या गिरफ्तार करने का विशेषाधिकार है। यदि वह शख्स गिरफ्तारी का विरोध करता है तो उसे जबरन गिरफ्तार करने का पूरा अधिकार सेना को है। यह अधिनियम हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को व्यापक अधिकार और न्यायिक छूट देता है। साथ ही सेना के जवानों को किसी भी व्‍यक्ति की तलाशी केवल संदेह के आधार पर लेने का अधिकार है। फिलहाल यह असम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और जम्मू-कश्मीर में लागू है।

29 मई 2014 को इरोम शर्मिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी चिट्ठी लिख चुकी हैं। मणिपुर में 14 साल से सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून (आफ़्स्पा) हटाए जाने की मांग के साथ भूख हड़ताल कर रहीं इरोम शर्मिला ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने प्रधानमंत्री से दरख़्वास्त की है कि वो ये क़ानून मणिपुर से हटा दें और एक ऐसे नेता बनें जो अहिंसा में विश्वास करता है। उन्होंने अपनी चिट्ठी में कलिंग के सम्राट अशोक के भयानक तबाही, हत्याओं और विलाप देखने के बाद अहिंसा का रास्ता चुनने का हवाला दिया है और उसे गुजरात दंगों से जोड़ा है।

इरोम ने लिखा है, “अशोक की ही तरह आप भी अपने देश पर अहिंसा के हथियार से राज करें, ताकि लोगों से प्यार और मोहब्ब्त मिले, और गोधरा के बाद बने मोदी-विरोधी गुटों में जो डर पैदा हुआ वो कम हो जाए।”

अपनी चिट्ठी में इरोम ने कहा है कि पांच साल पहले तक वो नरेंद्र मोदी को एक हिंसात्मक नेता के तौर पर ही जानती थीं, पर उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद अब वो उनसे शांति की उम्मीद रखती हैं।