वाइट टाइगर सफारी में सफेद बाघिन राधा की मौत

नई दिल्ली(7 दिसंबर): दुनिया के इकलौते ह्वाइट टाइगर सफारी मुकुंदपुर में मंगलवार की रात सफेद बाघिन की मौत हो गई। इस खबर के बाद से सफारी के प्रबंधन सहित पूरे वन विभाग में हड़कंप मच गया है। सूचना मिलने पर देर रात विभाग के अधिकारी रीवा और सतना से पहुंचे और मृत बाघिन को नाइट हाउस में रखा गया है।

बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद सफारी में ही अधिकारियों की मौजूदगी में दफनाया जाएगा। बताया गया है कि दो दिनों से सफेद बाघिन राधा बीमार चल रही थी और उसने खाना-पीना भी छोड़ दिया था। चिडिय़ाघर के चिकित्सक उपचार कर रहे थे, साथ ही पन्ना और बांधवगढ़ के विशेषज्ञों से भी सलाह ली जा रही थी। मंगलवार को रात्रि के करीब साढ़े नौबजे राधा की हालत बिगड़ी और कुछ देर के बाद ही उसकी मौत हो गई।  

आज दर्शकों के लिए बंद रहे सफारी

सफारी में सफेद बाघिन की मौत के बाद उसे दफनाने के कार्यमें किसी तरह का व्यवधान न आए, इस कारण चिडिय़ाघर और सफारी दर्शकों के लिए सात दिसंबर को बंद रहेंगे। सेंट्रल जू अथारिटी के निर्देंशों के तहत बाघ की मौत के बाद निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत ही अंतिम संस्कार किया जाता है। सफेद बाघिन के मौत का मामला हैइस वजह से प्रशासन ने भी गंभीरता से लिया है। बुधवार को प्रशासनिक अधिकारी भी मुकुंदपुर पहुंचेंगे।

भिलाई में हुआ था जन्म

राधा का जन्म छत्तीसगढ़ के भिलाई में स्थित मैत्रीबाग चिडिय़ाघर में 29 नवंबर 2011 को हुआ था। उसे रघु नाम के सफेद बाघ के साथ लाया गया था। इनदिनों राधा को रघु के साथ ही सफारी में छोड़ा गया था ताकि दोनों के मिलन से सफेद बाघों के प्रजाति की वंशवृद्धि हो। सफारी में कुछ दिन पहले राधा को रायल बंगाल टाइगर नकुल के साथ छोड़ा गया था। जिसके चलते उसने हमला बोल दिया था और गंभीर रूप से जख्मी कर दिया था। हालांकि सफारी से उस पीले बाघ को निकाल कर बाड़े में रखा गया है पर राधा की तबियत तभी से खराब चल रही थी, वह सफारी में एकांत में ही कई दिनों से बैठी रहती थी। उसकी मौत के पीछे इसे भी कारण माना जा रहा है, लेकिन जब तक पोस्टमार्टम की रिपोर्ट नहीं आती चिडिय़ाघर प्रबंधन कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है।