व्हाइट हाउस का अफसरों को कड़ा संदेश, राष्ट्रपति की पॉलिसी पसंद नहीं तो छोड़ दो नौकरी

नई दिल्ली(2 फरवरी): व्हाइट हाउस ने बुधवार को अमेरिकी अफसरों को कड़ा संदेश दिया है। इसमें कहा गया है कि जो अफसर डोनाल्ड ट्रम्प की पॉलिसीज से सहमत नहीं हैं वे इस्तीफा दे दें। इसके साथ ही खुले तौर पर विरोध करने वाले अफसरों को बर्खास्त करने का सिलसिला भी तेज हो गया है।

- सीनेट की फाइनेंशियल कमेटी के डेमोक्रेट मेंबर्स ने ट्रम्प के मनोनीत दो मंत्रियों की कन्फर्मेशन का बहिष्कार कर दिया।

- इसके बाद हेल्थ मिनिस्टर टॉम प्राइस और फाइनेंस मिनिस्टर स्टीफन मनूशिन की कन्फर्मेशन प्रोसेस रोक दी। डेमोक्रेट सांसदों ने कहा, "प्राइस की हेल्थ कंपनी के शेयरों के बारे में डिटेल में जानकारी चाहिए। स्टीफन पर वनवेस्ट बैंक में धांधली के आरोप हैं, उस बारे में ब्योरा चाहिए।

- इस बीच एग्जीक्यूटिव ऑर्डर को लेकर न्यूयॉर्क, वर्जीनिया, मैसाच्युसेट्स और सैन फ्रांसिस्को भी विरोध में खड़े हो गए हैं। इन्होंने कानूनी नोटिस भी दिया है।

ट्रम्प की कार्रवाई

- ट्रम्प के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर का विरोध करने वाली अटॉर्नी जनरल सैली येट्स को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

- डेनियल रेग्डेल की जगह थॉमस होमान को इमिग्रेशन चीफ बनाया गया।

- अब ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने साफ संदेश दे दिया है कि जो उनसे सहमत नहीं हैं, वो रिजाइन करके जा सकते हैं।

- व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ द स्टाफ रींस प्रीबस ने कहा, "हमने इन 7 देशों को चुना तो इसकी एक खास वजह है।"

- "कांग्रेस और ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन, दोनों ने इन 7 देशों की पहचान कर रखी थी कि वहां खतरनाक आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है।"

- प्रीबस ने कहा, "अब आप कुछ अन्य ऐसे देशों की ओर भी इशारा कर सकते हैं जहां एक तरह की समस्याएं हैं, जैसे कि पाकिस्तान और कुछ अन्य देश।"

- "शायद हमें इसे और आगे ले जाने की जरूरत है। फिलहाल इन देशों में जाने और वहां से आने वाले लोगों की गंभीरता से जांच-पड़ताल की जाएगी।"

- इसको लेकर येट्स ने कहा था, "मौजूदा वक्त में मैं न तो इस बात को लेकर आश्वस्त हूं कि एग्जीक्यूटिव ऑर्डर का बचाव कर पाऊंगी और न ही ये लगता है कि इसे कानूनी रूप से जांचकर बनाया गया। जस्टिस डिपार्टमेंट की हेड होने के नाते उनकी ये ड्यूटी है कि वे किसी भी ऑर्डर को कानून के हिसाब से जांचें-परखें।"

- व्हाइट हाउस ने कार्रवाई करते हुए लिखा, "मिस येट्स, जिन्हें ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन ने अप्वाइंट किया है, वे बॉर्डर्स से जुड़े मुद्दों पर कमजोर और इलीगल इमीग्रेशन पर तो बेहद कमजोर हैं।"