मृत्यु के बाद 13 दिन तक कहां रहती है 'आत्मा', जानिए

नई दिल्ली ( 20 दिसंबर ): गरूड़ पुराण वैष्णव सम्प्रदाय से संबंधित है। यह पुराणसनातन धर्म में मृत्यु के बाद सद्गति कैसे मिले? और मृत्यु के बाद क्या होता है? इन बातों की विस्तृत समावेश इस ग्रंथ में किया गया है। इस पुराण के अधिष्ठाता देव भगवान विष्णु हैं।

गरूड़ पुराण में कहा गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा को यमदूत केवल 24 घंटों के लिए ही ले जाते हैं और इन 24 घंटों के दौरान आत्मा को दिखाया जाता है कि उसने कितने पाप और कितने पुण्य किए हैं।

इसके बाद आत्मा को फिर उसी घर में छोड़ दिया जाता है जहां उसने शरीर का त्याग किया था। इसके बाद 13 दिन तक आत्मा वहीं रहती है। आत्मा को 13 दिन बाद फिर ले जाया जाता है।

पुराणों के अनुसार जब भी किसी मनुष्य की मृत्यु होती है और आत्मा शरीर को त्याग कर यात्रा प्रारंभ करती है तो इस दौरान उसे तीन प्रकार के मार्ग मिलते हैं जो कि क्रमशः अर्चि मार्ग, धूम मार्ग और उत्पत्ति-विनाश मार्ग। ये मार्ग 13 दिन बाद मिलता है।

जोकि उस व्यक्ति द्वारा किए गए कर्मों के अनुसार होते हैं। अर्चि मार्ग ब्रह्मलोक और देवलोक की यात्रा के लिए होता है, वहीं धूम मार्ग पितृलोक की यात्रा पर ले जाता है और उत्पत्ति-विनाश मार्ग नर्क की यात्रा के लिए है।

इस तरह आत्मा अलग-अलग मार्ग में चली जाती है। यहां कर्मों के अनुसार और यमराज द्वारा तय किए गए समय तक रहती है।

अर्चि मार्ग ब्रह्मलोक उत्तम माना जाता है। यदि किसी भी व्यक्ति ने जीवन भर कोई भी पाप या बुरे कर्म नहीं किए हों मोक्ष उसी को प्राप्त होता है।