...जब सरदार बनकर दुर्गा पूजा में शामिल हुए गांगुली

नई दिल्ली(4 फरवरी): टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली क्रिकेट के मैदान पर विरोधियों की तैयारी की तोड़ निकालने के लिए जाने जाते थे। क्रिकेट के मैदान से दूर वह अब उस समस्य का तोड़ निकाल रहे हैं जिससे कि वह आसानी से कहीं घूम सकें। गांगुली ने एक हद तक इस समस्या का तोड़ निकाल लिया था। वे भीड़ भाड़ इलाके में गए और उन्हें किसी ने पहचाना भी नहीं।

- ये बात अभी की नहीं है बल्कि कई साल पहले गांगुली ने ये जनता के बीच बिना किसी सुरक्षा के जाने की हिमाकत की थी। उन्होंने इस बात का खुलासा अपनी किताब ''अ सेंचुरी इज़ नॉट एनफ'' में किया है। 

- सौरव गांगुली अपने जीवन के यादगार लम्हों में से इस वाकये का भी जिक्र किताब में किया है। किताब के अनुसार गांगुली कोलकाता में सरदार के भेष में दुर्गा पूजा में शामिल हुए थे। उन्हें सरदार के रूप में उनकी पत्नी डोना ने तैयार किया था।

- गांगुली ने बताया, "मैंने देवी की प्रतिमा की विदाई में सरदार बनकर शामिल होने का मन बना लिया था। यानी कि मूर्ति विसर्जन में गांगुली शामिल हुए थे। गांगुली के अनुसार उनके सभी भाई-बहनों ने उनका मजाक उड़ाया। किसी को विश्वास नहीं था कि गांगुली अपना पहचान छिपाने में सफल होंगे। गांगुली ने इस चुनौती को स्वीकार कर लिया। 

- गांगुली ने प्रयास किया कि वे ट्रक से विसर्जन में जाएं। लेकिन पुलिस ने उन्हें अनुमति नहीं दी। तब गांगुली अपनी बेटी के साथ कार में गाए। जहां एक पुलिस इंस्पेक्टर ने गांगुली की कार के अंदर झांका। गांगुली को गौर से देखा और मुस्करा दिया। तब गांगुली को थोड़ी शर्मिंदगी महसूस हुई लेकिन तभी उन्होंने पुलिस वाले को चुप रहने का इशारा किया। आखिरकार गांगुली की कोशिश रंग लाई और वे मूर्ति 'विसर्जन' में शामिल हो सके।