अमेरिका-ईरान परमाणु समझौता रद्द होने से भारत पर पड़ेगा यह प्रभाव

नई दिल्ली (09 मई): मंगलवार को अमेरिका ने ईरान के साथ हुए अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते को दरकिनार करते हुए उससे अलग होने का फैसला कर लिया। हालांकि अमेरिका के इस निर्णय को दुनिया के कई देश सही नहीं मान रहे हैं और खुलेआम उनकी आलोचना कर रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते से अमरीका का अलग होना भारत समेत दुनिया के बाकी देशों पर किया असर डालेगा। ऐशियाई देशों पर अमेरिका के इस कदम का प्रभाव कितना पड़ेगा।

तेल खपत के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है। वहीं भारत जिन देशों से तेल खरीदता है, उनमें ईरान तीसरे नंबर पर और सऊदी अरब, ईराक पहले और दूसरे नंबर पर आते हैं। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। इसका पहले से तेल की कीमत से परेशान भारत के लिए यह एक बड़े झटके जैसा होगा। बता दें कि अमेरिका की इस कार्रवाई से पहले ही वर्ल्ड बैंग ने तेल की कीमतों में 20 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान जताया था। 

वहीं भारत ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ईरान के चाहबहार पोर्ट को डिवेलप करने के लिए 500 मिलियन डॉलर की रकम खर्च करने का वादा किया है। यह प्रॉजेक्ट पहले से ही देरी से चल रहा है। अगर नई दिल्ली इसमें निवेश जारी रखता है तो यह भारत द्वारा अमेरिका के खिलाफ जाने जैसा मुद्दा हो सकता है। पाकिस्तान में चीन द्वारा विकसित ग्वादर पोर्ट से महज 85 किलोमीटर दूर यह बंदरगाह भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे भारत पाकिस्तान को बाईपास कर अफगानिस्तान या मध्य एशिया पहुंच सकता है। इससे भारत से अफगानिस्तान जाने वाले माल की लागत और समय भी होगा। भारत, अफगानिस्तान और ईरान के बीच व्यापार का बड़ा प्लैटफॉर्म बना सकता है।ओबामा के ईरान के साथ परमाणु समझौते के बाद भारत और ईरान के संबंधों में घनिष्ठता आई थी। साथ ही इजरायल और सऊदी अरब से भी रिश्ते अच्छे हुए थे। वहीं अब अमेरिका के इस डील से अलग होने के बाद सऊदी अरब और इजरायल ने भी इस कदम की सराहना की है। ऐसे में भारत यदि ईरान के साथ संबंधों में मजबूती दिखाता है तो उसे इजरायल और सऊदी अरब की नाराजगी भी झेलनी पड़ सकती है।