भूकंप आया तो बजने लगेगा सायरन

देहरादून(25 फरवरी): उत्तराखंड का कई हिस्सा भूकंप के लिहाज से अति संवेदनशील क्षेत्र में आता है। अगर भूकंप की जानकारी पहले ही मिल जाए तो जानमाल का नुकसान कम हो सकता है।

- इसी को ध्यान में रखते हुए आइआइटी रुड़की ने रीजनल अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित किया है। इसके तहत राज्य के संवेदनशील इलाकों में सेंसर लगाए जा रहे हैं, जो भूकंप आने की स्थिति में सायरन के जरिये लोगों को अलर्ट करेंगे।

- भूकंप आने की स्थिति में मोबाइल से एक विशेष प्रकार की बीप के साथ एलर्ट जारी किया जाएगा।  

- अर्ली वार्निंग सिस्टम को आल इंडिया रेडियो से भी कनेक्ट किया जाएगा। जहां पर कनेक्टिविटी नहीं है, वहां रेडियो के माध्यम से सायरन बजेगा। यदि रेडियो बंद है तब भी सायरन बजेगा। अर्ली वार्निंग सिस्टम का साफ्टवेयर भी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि अभी तक 84 सेंसर लगाए गए हैं। 1100 सेंसर और लगाए जाने हैं। सेंसर लगाने के बाद सभी संवेदनशील स्थानों पर सायरन लगाए जााएंगे।

- राज्य में भूकंप के खतरे से निपटने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए पूरे राज्य में करीब 1100 सेंसर लगाए जाएंगे।

-  मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सलाहकार समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। राज्य में भूकंप की पूर्व चेतावनी देने के लिए आईआईटी रुड़की की तरफ से अर्ली वाॅर्निंग सिस्टम तैयार किया जा रहा है। यह सेंसर सिस्टम 30 से 50सेकेंड पहले भूकंप की चेतावनी जारी करता है।

- आपको बता दें कि राज्य में फिलहाल इस तरह के 84 सेंसर सिस्टम लगाया गया है। इस सिस्टम 6 रिक्टर स्केल वाले भूकंप के पहले सायरन बजाकर लोगों को सूचित करता था लेकिन नए लगने वाले सेंसर 5.5 रिक्टर स्केल वाले भूकंप पर भी सायरन बजाएगा।

- गौरतलब है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान आईआईटी रूड़की के भूकंप वैज्ञानिक अशोक कुमार ने बताया कि सिस्टम का पता लगाने के लिए एक मोबाइल एप भी तैयार किया गया है। भूकंप आने की स्थिति में मोबाइल से एक विशेष प्रकार की बीप के जरिए लोगों को सावधान किया जाएगा।

- वैज्ञानिकों ने कहा कि अनी वाॅर्निंग सिस्टम को आॅल रेडियो से भी जोड़ा जाएगा। इससे फायदा यह होगा कि जिन क्षेत्रों में मोबाइल की कनेक्टिविटी नहीं है वहां रेडियो के जरिए सायरन बजेगा। अगर आपका रेडियो बंद है तो भी तब भी सायरन बजेगा। अर्ली वार्निंग सिस्टम का साफ्टवेयर भी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि सेंसर लग जाने के बाद राज्य के सभी संवेदनशील स्थानों पर सायरन बजेंगे। ऐसे में भूकंप आने से होने वाले जान माल के नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकेगा।