दिवार पर घड़ी लगाते वक्त इन बातों का रखें ध्यान, कभी नहीं आएगा बुरा वक्त

नई दिल्ली (7 जनवरी): हम में से सभी के घरों में छोटी-बड़ी दिवार घड़ी जरूर टंगी होती है। दिवार पर ये घड़ी हम उस जगह पर लगाते हैं जहां आसानी से हम इसे देख सके और समय का ध्यान रख सके। लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि वास्तु में घड़ी लगाने की भी शुभ और अशुभ दिशा होती है और ये हमारे जीवन पर साकारात्मक और नाकारात्मक प्रभाव भी डालता है।

दिवार पर घड़ी लगाते वक्त इन बातों का रखें ध्यान...

- बहुत पुरानी, बार-बार खराब होने वाली और धुंधले शीशे वाली घड़ियां शुभ नहीं मानी जातीं। ये परिवार की सफलता में बाधक होती हैं। इससे परिश्रम का उचित फल नहीं मिलता।

- घड़ी लगाने के लिए उत्तर, पूर्व तथा पश्चिम दिशा को उत्तम माना जाता है। इनमें से किसी एक दिशा में घड़ी लगाने से घर में शुभ समय आता है।

- कमरे का दरवाजा ऐसा स्थान है जहां से मनुष्य ही नहीं प्रकृति की ऊर्जा भी प्रवेश करती है। दरवाजे पर घड़ी लगाना शुभ नहीं माना गया है। कहते हैं कि इससे घर में खुशियों के क्षण प्रवेश नहीं करते और परिवार में अच्छा माहौल नहीं रहता।

- दक्षिण दिशा यम का रास्ता मानी जाती है। दूसरे शब्दों में कहें तो मृत्यु की दिशा। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के दक्षिणी हिस्से में कभी घड़ी नहीं लगानी चाहिए। दक्षिण में लगाई हुई घड़ी परिजनों की आयु और सौभाग्य के लिए अशुभ मानी जाती है।

- कार्यस्थल पर ऐसी घड़ी होनी चाहिए जो आकार में कुछ बड़ी, साफ और दिखने में सुंदर हो। बहुत पुरानी और रुक-रुक कर चलने वाली घड़ी कार्यालय में नकारात्मक ऊर्जा तथा सुस्ती लाती हैं।

- कार्यस्थल पर बंद घड़ी भी नहीं रखनी चाहिए। वास्तव में बंद घड़ी ठहराव और पतन का सूचक होती हैं। घर में भी बंद घड़ी शुभ नहीं मानी जाती। अगर ऐसी घड़ी चलने लायक न हो तो उसे उतारकर पुराने सामान के साथ रख देना चाहिए।

- घड़ी का समय बिल्कुल सही या दो-तीन मिनट आगे रखना चाहिए। निर्धारित समय से पीछे रखने से जीवन में बाधाएं आती हैं। ऐसा व्यक्ति परिश्रम का फल तथा प्रसन्नता प्राप्त करने में पीछे रहता है। वहीं, इससे दैनिक कार्यों में भी परेशानी हो सकती है।