मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों की बढ़ सकती है मजदूरी

नई दिल्ली ( 8 फरवरी ): महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) के तहत दिए जाने वाली मजदूरी को बढ़ाए जाने की संभावना है। ग्रामीण विकास मंत्रालय श्रमिकों को भुगतान के लिए तय बेसलाइन में संशोधन पर विचार कर रहा है, ताकि महंगाई की मार से ग्रामीण इलाकों में गरीबों को बचाया जा सके।

मनरेगा के तहत मजदूरी के भुगतान के लिए बेसलाइन में सालाना संशोधन के तहत इसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक कृषि श्रमिक (सीपीआई-एएल) से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक ग्रामीण (सीपीआई-ग्रामीण) किया जा सकता है। ग्रामीण विकास सचिव अमरजीत सिन्हा ने कहा, 'हम मनरेगा के तहत भुगतान के लिए बेसलाइन में संशोधन पर एस महेंद्र देव समिति के सुझावों पर विचार कर रहे हैं। इस बारे में अंतिम फैसला सभी राज्य सरकारों के साथ विचार विमर्श के बाद किया जाएगा।'

केंद्र द्वारा गठित देव की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति ने सुझाव दिया है कि मनरेगा के तहत मजदूरी राज्यों में न्यूनतम मजदूरी के समान या ऊंची होनी चाहिए। समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि मनरेगा की मजदूरी का हर साल सीपीआई-ग्रामीण के आधार पर संशोधन किया जाना चाहिए। सूत्रों ने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने पहले ही इस प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय के पास भेज दिया है। वित्त मंत्रालय इस पर और चर्चा चाहता है।