OMG! इस सफाईकर्मी को पिछले 17 साल से मिल रही है 2 रुपये रोजाना सैलरी

नई दिल्ली (26 मई): देश में लंबे समय से न्यूनतम मजदूरी तय है, लेकिन तमिलनाडु में पशुपालन विभाग में एक व्यक्ति पिछले 17 साल के 2 रुपये प्रतिदिन की दैनिक मजदूरी पर काम करने को मजबूर हैं। आर्थिक तंगी से परेशान और परिवार की माली आर्थिक हालात की वजह से 20 जुलाई 2000 को एम रविकुमार पशुपालन विभाग में  वेल्लोडु उपकेंद्र पर 2 रुपये प्रतिदिन की तनख्वाह पर बतौर पार्ट टाइम सफाईकर्मी काम करना शुरू किया। उसे उम्मीद था कि एक-दो साल में उसकी नौकरी पक्की हो जाएगी और तनख्वाह भी बढ़ जाएगी। लेकिन पिछले 17 साल से वो 2 रुपये प्रतिदिन की पगार पर मजदूरी करने को मजबूर है। अब इसने अपनी सेवा नियमित करने के लिए मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

एम रविकुमार की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए जस्टिस एम गोविंदाराजू ने पशुपालन विभाग द्वारा सहायकों की नियुक्ति के लिए साक्षात्कार के लिए बुलाने पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। इरोड जिले के वेल्लोडु में विभाग के उपकेंद्र पर नियुक्त याचिकाकर्ता ने कहा कि वह एक गरीब परिवार से है। उसे अपनी पढ़ाई छोड़कर परिवार को पालने के लिए काम करना पड़ा।  

एम रविकुमार को मुताबिक उसे तब बड़ा झटका लगा जब पता चला कि सहायकों की नियुक्ति के लिए विभाग द्वारा एक अधिसूचना जारी की गई है और उसके दावे पर विचार के लिए दिए गए आवेदन को नहीं स्वीकार किया गया। कई सरकारी आदेशों का हवाला देते हुए उसने कहा कि अंशकालिक या दैनिक मजदूर सरकारी सेवा में शामिल होने के पात्र हैं।  

अपने जवाबी हलफनामे में विभाग ने उसके नाम को प्रायोजित नहीं करने के लिए रोजगार कार्यालय को जिम्मेदार ठहराया है। रविकुमार ने कहा कि उसके जैसे कर्मचारियों को दशकों तक अनियमित रखना सरकार की तरफ से अमानवीय है। रविकुमार ने हाईकोर्ट से उसे विभाग में बतौर सहायक नियुक्त करने के लिए अधिकारियों को निर्देश जारी करने की मांह की है।