इस महिला के हाथ में होगी इसरो के 'मानव अंतरिक्ष उड़ान' की कमान

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (29 दिसंबर): भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) में कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व संभालकर महिलाओं ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत के रॉकेट प्रोग्राम तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली ललिताम्बिका वीआर को देश के ह्यूमन स्पेस फ्लाइट प्रोग्राम का नेतृत्व करने के लिए चुना गया है। स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने इसरो के महत्वकांक्षी गगनयान मिशन की घोषणा की थी। इसरो ने अपने पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान परियोजना की तैयारियां शुरू कर ली है और अगर यह सफल हो जाता है तो अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चौथा देश बन जाएगा जिसने अंतरिक्ष में मानव को भेजा होगा।इसरो के चेयरमैन के. शिवन ने डॉ. ललिताम्बिका के बारे में बताया कि उनके पास न सिर्फ तकनीकी बल्कि प्रबंधकीय अनुभव भी है। इसरो महिला और पुरुष के बीच कभी भेदभाव नहीं करता है। हम हमेशा उन्हें चुनते हैं जो उस काम के लिए उपयुक्त हैं। हमें अपनी दोनों महिला सहकर्मी इसके लिए काबिल लगीं। डॉ. शिवन ने जिन दूसरी महिला वैज्ञानिक की बात की वो डॉक्टर अनुराधा टीके हैं जो इसरो के सैटेलाइट कम्युनिकेशन प्रोग्राम का नेतृत्व करने जा रही हैं।

जल्द ही भारत दुनिया के उन चार बड़े देशों की श्रेणी में शामिल होगा जिसने अंतरिक्ष में अपना मानव मिशन भेजा है। अब तक अमेरिका, रूस और चीन अपने मिशन को भेज चुका है। भारत में इस मिशन पर काम शुरू हो गया है जिसका नाम गगनयान मिशन रखा गया है। इसे 2022 में अमलीजामा पहनाया जाएगा। इसके तहत 3 अंतरिक्षयात्रियों को 7 दिनों के लिए पृथ्वी की कक्षा में भेजने की योजना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के इस महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन की घोषणा 15 अगस्त, 2018 को लाल किला के प्राचीर से की थी। इस मिशन की कमान वी.आर.ललिताम्बिका के हाथों में होगी जिनको इसका निदेशक नियुक्त किया गया है। उन्होंने कई सफल मिशन की कमान संभाली है। उनको इस फील्ड में कई सालों का अनुभव है।कई सफल प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रहीं

उन्होंने 1988 में तिरुअनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) को जॉइन किया। वह अडवांस्ड लॉन्च वीइकल टेक्नॉलजी की स्पेशलिस्ट हैं। उन्होंने उस टीम का नेतृत्व किया जो रॉकेट कंट्रोल और गाइडेंस सिस्टम का डिजाइन तैयार करती है। उन्होंने इसरो के रॉकेट्स जैसे आगमेंटेड सैटलाइट लॉन्च वीइकल (एएसएलवी), पोलर सैटलाइट लॉन्च वीइकल (पीएसएलवी) और जेओसिन्क्रोनस सैटाइल लॉन्च वीइकल (जीएसएलवी) और रीयूजेवल लॉन्च वीइकल (पीएलवी) पर काम किया है।104 रॉकेट्स लॉन्च में योगदान

जब भारत ने एक साथ 104 सैटलाइट्स को अंतरिक्ष में छोड़ा था दुनिया भर में इसरो की तारीफ होने लगी थी। इस मिशन में ललिताम्बिका की टीम का बड़ा योगदान था। टीम ने यह सुनिश्चित किया था कि सभी सैटलाइट अपनी कक्षा में रहें और एक-दूसरे से टकराए नहीं। टीम ने बुरी से बुरी स्थिति से भी निपटने के लिए तैयारी कर रखी थी।

10 हजार करोड़ की मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कल हुई कैबिनेट की मीटिंग में एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए इसरो के मिशन गगनयान के लिए 10 हजार करोड़ रुपए को मंजूरी दे दी है। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कैबिनेट की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में बताया कि इस योजना को मंजूरी मिलने के बाद अगले 40 महीने के अंदर लॉन्च कर दिया जाएगा। रविशंकर ने कहा कि आज दुनिया ने अंतरिक्ष में भारत का लोहा माना है।  दुनिया के अन्य देश भी सेटेलाइट लॉन्च के लिए इसरो की मदद ले रहे हैं।