बंदूक की नोक पर POK में वोटिंग...

नई दिल्ली (21 जुलाई): दोगला पाकिस्तान दुनिया को धोखा दे रहा है। गुलाम कश्मीर में पाकिस्तान कर रहा है बहुत बड़ा गोलमाल। कहने को तो आज पीओके में चुनाव हुआ, लेकिन ये चुनाव सिर्फ दुनिया को दिखाने के लिए था। असल में तो वहां मजाक हुआ, लोगों की आवाज़ को दबाया गया। सोचिए पीओके में चुनाव हुआ, लेकिन पीओके की किसी राजनीतिक पार्टी ने इसमें हिस्सा नहीं लिया और तो और चुनाव करवाने के लिए पाक सेना के करीब 30 हजार जवानों को तैनात किया गया।

PoK में चुनाव के नाम पर धोखा: - चुनाव में 26 राजनीतिक दल हिस्सा ले रहे हैं - चुनाव में PoK का कोई भी राजनीतिक दल नहीं है - 27 लाख मतदाताओं में 5.5 लाख मतदाता पाकिस्तान में बैठकर वोटिंग करेंगे - 423 उम्मीदवारों में 99 उम्मीदवार बाहर के हैं

चुनाव कराने के नाम पर पाकिस्तान ने 29 हज़ार से अधिक सैनिक PoK में तैनात कर रखे हैं। सेना के जवान लोगों को घरों से निकालकर जबरदस्ती वोट डलवा रहे हैं। मुजफ्फराबाद में पुलिस ने मेडिकल के स्टूडेंट्स को दौड़ा-दौड़ा कर मारा जो अपना हक मांग रहे थे। पुलिस ने लड़कियों तक को नहीं बख्शा।

PoK को लेकर पाकिस्तान के दोहरेपन का आलम ये है कि एक तरफ तो वो इसे आज़ाद कश्मीर कहता है तो दूसरी ओर यहां के प्रशासन और राजनीति में सीधा दखल रखता है। PoK का शासन इस्लामाबाद से सीधे तौर पर चलाया जाता है। पाकिस्तान दावा करता है कि यहां 1974 से चुनाव करवाया जा रहा है, वहां एक प्रधानमंत्री भी है। लेकिन PoK या पाकिस्तान के बाहर इस दावे को मान्यता नहीं मिली है। पाकिस्तान के दोहरे रवैये का सबूत इसी बात से मिलता है कि PoK में प्रधानमंत्री से कश्मीर पर पाकिस्तान के नियंत्रण संबंधी हलफनामे पर दस्तखत कराया जाता है।

पीओके में लोग गरीबी से मर रहे हैं, वहां के नौजवानों के लिए नौकरियां नहीं हैं और जब लोग अपने हक के लिए आवाज उठाते हैं तो पाकिस्तानी हुकूमत आवाज उठाने वलों को बेरहमी से पीटती है। दरअसल पीओके में रह रहे लोगों को पाकिस्तान की आम आवाम के बराबर आजादी हासिल नहीं है। उनके साथ खुलकर भेदभाव होता है, उन्हें किसी न किसी वजह से सरकारी नौकरियों में रिजेक्ट कर दिया जाता है। इसी भेदभाव की वजह से लोग सड़कों पर उतरते हैं।

पाकिस्तान के कब्जे वाले इस इलाके में लोग भूख से बिलबिला रहे हैं, लेकिन इस्लामाबाद में बैठे हुक्मरानों को इससे कोई मतलब नहीं। वो ऐसे झूठे चुनाव करवाकर दुनिया को दिखाना चाहता है कि पीओके में लोकतंत्र है। लोग अपनी मर्जी से सरकार चुन रहे हैं, लेकिन सच्चाई ये नहीं है। लोगों को जबरदस्ती एक हुकूमत के डंडे तले जीने को मजबूर किया जा रहा है।